अमेरिका-चीन व्यापार समझौते पर अचानक हस्ताक्षर, ट्रंप ने भारत के साथ “बहुत बड़ी डील” का भी दिया संकेत
अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत में उस समय हलचल मच गई जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक ऐलान कर दिया कि अमेरिका और चीन के बीच एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौता हो चुका है। इस घोषणा ने न सिर्फ वैश्विक बाजारों को चौंकाया, बल्कि संभावित नई कूटनीतिक समीकरणों की ओर भी इशारा कर दिया है। हालांकि, इस समझौते को लेकर अभी तक न तो राष्ट्रपति ट्रंप और न ही अमेरिका के वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने कोई विशेष विवरण साझा किया है, जिससे इसे लेकर रहस्य और भी गहरा गया है। ट्रंप ने गुरुवार देर रात कहा, “हमने अभी-अभी चीन के साथ इस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।” वहीं लुटनिक ने ब्लूमबर्ग टीवी पर पुष्टि की कि यह समझौता इस हफ्ते की शुरुआत में ही हो गया था।
चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने भी इस समझौते की पुष्टि की, लेकिन उन्होंने विशेष रूप से उस मुद्दे पर कोई साफ जानकारी नहीं दी जो इस पूरी तनातनी का केंद्र रहा है—दुर्लभ खनिजों का निर्यात। इन खनिजों का उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों और हाई-टेक प्रोडक्ट्स में होता है और चीन लंबे समय से इनके निर्यात पर नियंत्रण रखता आया है। मंत्रालय ने कहा कि जिन उत्पादों पर कानूनी शर्तें पूरी होंगी, उन्हें निर्यात की मंजूरी दी जाएगी। इसके बदले अमेरिका भी चीन पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों को हटाने के लिए तैयार हो गया है। अमेरिकी पक्ष को भरोसा है कि दोनों देश अब समान स्तर पर काम करेंगे और आगे की बातचीत की दिशा भी सकारात्मक होगी।
इस समझौते के बीच एक और बड़ी घोषणा ने ध्यान खींचा। व्हाइट हाउस में टैक्स और खर्चों में कटौती संबंधी एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका जल्द ही भारत के साथ एक “बहुत बड़ा” व्यापार समझौता करने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका अब चुनिंदा देशों के साथ ही समझौते करेगा और अन्य को सीधे सख्त टैरिफ नियमों से जवाब देगा। ट्रंप ने दो टूक कहा, “हम हर किसी से समझौता नहीं करेंगे। कुछ को तो बस एक चिट्ठी भेजकर कहेंगे—धन्यवाद, आप 25, 35 या 45 प्रतिशत टैरिफ चुकाइए। यही आसान तरीका है।”
गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल को लागू की गई नई टैरिफ नीति को 9 जुलाई तक के लिए टाल रखा है, जिससे इस समयावधि में भारत के साथ किसी बड़ी व्यापारिक डील की संभावनाएं और भी प्रबल हो जाती हैं।
अमेरिका-चीन समझौते और भारत को लेकर किए गए ट्रंप के बयान से ये साफ है कि वैश्विक व्यापार की दिशा एक नए मोड़ पर है, जहां नए गठबंधन, रणनीतिक साझेदारियां और आर्थिक निर्णय आने वाले हफ्तों में बड़ा असर डाल सकते हैं।
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