रेरा का बड़ा फैसला: घर खरीददार को मिलेगा पूरा पैसा वापस, बिल्डर को 15 जुलाई तक रिफंड का आदेश
घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने एक बड़ी राहत देने वाला फैसला सुनाया है। महाराष्ट्र रेरा (महारेरा) ने मुंबई के मुलुंड इलाके में स्थित लोढ़ा डेवलपर्स के खिलाफ एक मामले में स्पष्ट आदेश दिया है कि बिल्डर को बुकिंग रद्द करने वाले ग्राहक को उसकी पूरी राशि लौटानी होगी। यह आदेश उन सभी ग्राहकों के लिए नजीर बन सकता है जो बुकिंग अमाउंट रिफंड को लेकर बिल्डरों के चक्कर काटते रहते हैं।
मामला एक ऐसे ग्राहक से जुड़ा है जिसने 2.27 करोड़ रुपये का फ्लैट खरीदने के लिए लोढ़ा ग्रुप की एक परियोजना में 7 लाख रुपये बतौर बुकिंग अमाउंट दिए थे। उसे सेल्स मैनेजर की ओर से मौखिक आश्वासन दिया गया था कि यदि किसी कारणवश वह लोन नहीं ले पाता या आर्थिक स्थिति बाधा बनती है, तो बुकिंग राशि लौटा दी जाएगी। लेकिन जैसे ही ग्राहक का होम लोन ऐप्लिकेशन बैंक द्वारा रिजेक्ट कर दिया गया और उसने रिफंड की मांग की, बिल्डर ने नियमों का हवाला देते हुए पैसे लौटाने से साफ इनकार कर दिया।
हताश होकर ग्राहक ने महारेरा में शिकायत दर्ज करवाई। सुनवाई के दौरान बिल्डर ने बुकिंग फॉर्म की शर्तों के खंड 1.4 और 3.5 का हवाला दिया, जिसमें रिफंड की संभावना से इनकार किया गया था। लेकिन महारेरा ने पाया कि ग्राहक को इन शर्तों के बारे में न तो सही जानकारी दी गई थी और न ही उसे स्पष्ट रूप से बताया गया कि मौखिक आश्वासन लिखित शर्तों से मेल नहीं खाता।
फैसले में महारेरा ने कहा कि जब ग्राहक ने बुकिंग 18 नवंबर को की और सिर्फ 9 दिन बाद 27 नवंबर को बिल्डर को सूचित किया कि लोन रिजेक्ट हो गया है, तो उस पर शर्तों का सख्त पालन थोपना उचित नहीं है। साथ ही, बिल्डर द्वारा यह तर्क देना कि उन्होंने संभावित खरीदारों को खो दिया और उन्हें प्रक्रिया में लागत आई, ग्राहकों की सुरक्षा के उद्देश्य से बनाए गए कानून की भावना के खिलाफ है।
महारेरा ने स्पष्ट रूप से आदेश दिया कि बिल्डर को 15 जुलाई 2025 तक ग्राहक को बिना ब्याज 6,65,000 रुपये लौटाने होंगे। अगर यह रकम निर्धारित तिथि तक नहीं लौटाई गई, तो 16 जुलाई से उस पर भारतीय स्टेट बैंक की उच्चतम MCLR से 2% अधिक ब्याज दर के साथ रिफंड करना होगा। यह फैसला उन सभी फ्लैट खरीदारों के लिए उम्मीद की किरण है जो बुकिंग के बाद किसी कारणवश समझौता तोड़ने को मजबूर हो जाते हैं और फिर पैसा फंसने का डर सताता है।
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