‘रांझणा’ के 12 साल: कुंदन और जोया की अधूरी मोहब्बत ने बिखेर दिए कई दिल, आज भी याद है वो एकतरफा इश्क

फिल्म ‘रांझणा’ को रिलीज हुए 12 साल हो गए हैं, लेकिन इस फिल्म का असर आज भी दर्शकों के दिलों पर वैसा ही है। 21 जून 2013 को आई इस प्रेमकहानी ने कई जिंदगियों को छू लिया था। एकतरफा मोहब्बत की आग में झुलसे कुंदन की कहानी ने जहां दर्शकों को रुलाया, वहीं फिल्म के अंत में हर कोई यही सोचता रहा—काश ऐसा न हुआ होता। बनारस की गलियों से उठी ये कहानी, केवल कुंदन और जोया की नहीं, बल्कि कई अधूरी कहानियों का दर्द बयां करती है।

फिल्म में धनुष और सोनम कपूर की जोड़ी पहली बार साथ में नजर आई थी। साउथ सुपरस्टार धनुष को एक बनारसी लड़के के रूप में देखना दर्शकों के लिए एक नया अनुभव था, और उन्होंने इसे बखूबी निभाया। रांझणा की लोकप्रियता समय के साथ बढ़ती गई। इसके संवाद, गाने और किरदार आज भी उतने ही प्रभावी लगते हैं।

कहानी में केवल कुंदन ही नहीं, बल्कि जोया, बिंदिया और पंडित जैसे किरदार भी अधूरे रह गए। कुंदन का प्यार एकतरफा था और इस चक्कर में उसने जोया और बिंदिया दोनों के दिल तोड़े। जोया को कुंदन से कोई प्यार नहीं था, जबकि बिंदिया ने बचपन से उसे चाहा, लेकिन अंत तक उसे सिर्फ खाली इंतजार ही मिला।

फिल्म का सबसे मार्मिक डायलॉग क्लाइमैक्स में आता है, जहाँ कुंदन अपने टूटे हुए प्यार को स्वीकार करता है— “अब साला मूड नहीं है… आंखें मूंद लेने में ही सुख है।” यह संवाद न केवल कुंदन के इमोशन को दर्शाता है, बल्कि फिल्म का सार भी बन जाता है।

जोया को जहां कई लोगों ने फिल्म में नकारात्मक किरदार की तरह देखा, वहीं दूसरी ओर उसकी भी मजबूरियां थीं। उसने कुंदन से आगे बढ़ने की कोशिश की थी, लेकिन उसकी कहानी भी कुंदन की गलतियों की वजह से बिखर गई। वहीं बिंदिया, जो पूरी तरह कुंदन में खो चुकी थी, अंत तक सिर्फ तड़पती रही।

एक सीन, जिसमें होली के मौके पर कुंदन लाल रंग में रंगा होता है और जोया पीले कपड़ों में बैंगनी रंग हाथ में लेकर आती है, फिल्म का सबसे प्रतीकात्मक दृश्य है। वह दृश्य यह दर्शाता है कि जोया पर कुंदन का रंग नहीं चढ़ा, लेकिन कुंदन पर जोया का असर पूरी तरह से छा गया।

आनंद एल राय के निर्देशन में बनी इस फिल्म में बनारस को बेहद खूबसूरती से दर्शाया गया है। शहर के घाट, गलियां, मंदिर और मस्जिद—सभी मिलकर इस कहानी को एक गहराई प्रदान करते हैं। सोनम कपूर के करियर की यह फिल्म आज भी उनकी सबसे यादगार फिल्मों में गिनी जाती है।

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