ढाका: शेख हसीना ने मोहम्मद यूनुस पर साधा तीखा निशाना, बोलीं– तानाशाही थोपकर बांग्लादेश को अराजकता की ओर धकेल रहे हैंa

पूर्व प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि यूनुस प्रशासन कट्टरपंथियों को बढ़ावा दे रहा है, जिससे अल्पसंख्यक और महिलाएं निशाने पर हैं; कहा– बिना जनमत के कोई लोकतंत्र संभव नहीं

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और आवामी लीग की प्रमुख शेख हसीना ने अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यूनुस की अंतरिम सरकार देश में कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों को खुली छूट दे रही है, जिससे अल्पसंख्यक समुदायों, महिलाओं और आदिवासियों पर हमलों में तेजी आई है। हसीना ने चेताया कि बांग्लादेश एक बार फिर उसी अंधेरे दौर में लौट रहा है, जब आतंक और असहिष्णुता ने देश को झकझोर दिया था।

द वीक पत्रिका में लिखे एक लेख में शेख हसीना ने कहा कि यूनुस प्रशासन देश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में नाकाम रहा है और उसने उग्रवादी समूहों को पनपने का अवसर दिया है। उन्होंने हिज्ब उत-तहरीर जैसे संगठनों का नाम लेते हुए कहा कि ये वही ताकतें हैं, जिन्होंने 2016 में होली आर्टिजन कैफे पर भयावह हमला किया था। “हमने उन तत्वों को खत्म करने में दिन-रात मेहनत की थी, लेकिन आज वही फिर सिर उठा रहे हैं,” हसीना ने लिखा।

हसीना ने दावा किया कि यूनुस सरकार बनने के शुरुआती हफ्तों में ही हिंदू, बौद्ध, ईसाई और आदिवासी समुदायों पर हजारों हमले हुए। मंदिरों और पूजा स्थलों को नष्ट किया गया, घरों में आग लगाई गई और महिलाओं को निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि अपराधियों को कोई सजा नहीं मिल रही, जिससे देश में भय और अविश्वास का माहौल बन गया है।

पूर्व प्रधानमंत्री ने यूनुस पर आवामी लीग पर प्रतिबंध लगाने, लाखों नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित करने और एक “असंवैधानिक चार्टर” लागू करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “सच्चा लोकतंत्र तभी संभव है जब देश पर ऐसा नेता शासन करे, जिसे जनता ने चुना हो। यूनुस ने बिना जनमत के सत्ता संभाली है और अब सुधारों के नाम पर तानाशाही को वैध बनाने की कोशिश कर रहे हैं।”

अपने शासनकाल की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए हसीना ने कहा कि उनके कार्यकाल में बांग्लादेश की जीडीपी 47 अरब डॉलर से बढ़कर करीब 600 अरब डॉलर तक पहुंची। लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया, महिलाएं बड़ी संख्या में कार्यबल का हिस्सा बनीं और विदेशी मुद्रा भंडार ऐतिहासिक स्तर पर पहुंचा। उन्होंने कहा, “यूनुस शासन का अनुभव नहीं रखते और उनके नियंत्रण की कमी आज आम बांग्लादेशियों को साफ दिखाई दे रही है। अब समय आ गया है कि बांग्लादेश में सच्चे लोकतांत्रिक और भागीदारी वाले चुनावों की परंपरा को फिर से स्थापित किया जाए।”

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