थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा पर एक बार फिर हिंसा भड़क उठी है। थाई वायु सेना ने कंबोडियाई ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। यह वही इलाका है, जहां 45 दिन पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की मध्यस्थता से युद्धविराम कराया गया था। अब दोनों देश एक-दूसरे पर सीजफायर तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि सीमा पर स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
सोमवार तड़के सबसे पहले थाईलैंड की ओर से आरोप लगाया गया कि कंबोडिया ने लगभग 3 बजे (स्थानीय समय) थाई सीमा को निशाना बनाया। थाई सेना के अनुसार इस हमले में एक सैनिक की मौत हुई और दो घायल हुए। इसके बाद थाई वायुसेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कंबोडियाई सैन्य ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की, जिसमें कई ठिकानों को नुकसान पहुंचने की खबर है। थाई सेना का कहना है कि वह अपनी सीमा और सैनिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठा रही है।
उधर कंबोडिया ने कहा कि हमला उसके प्रेह विहियर प्रांत के अन सेस क्षेत्र में सुबह 5:04 बजे (स्थानीय समय) किया गया। कंबोडिया के रक्षा मंत्रालय ने एयर स्ट्राइक की पुष्टि करते हुए इसे ‘अमानवीय और बर्बर हमला’ बताया। कंबोडिया का यह भी कहना है कि उसने किसी तरह की जवाबी कार्रवाई नहीं की, लेकिन वह इस हमले की कड़ी निंदा करता है। कंबोडियाई सेना का आरोप है कि थाईलैंड ने 26 अक्टूबर को हुए सीजफायर का खुला उल्लंघन किया है, जिसे दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के तहत स्वीकार किया था।
तनाव की जड़ जुलाई 2025 में हुई वह खूनखराबा है, जिसने दोनों देशों के बीच सीमावर्ती संघर्ष को युद्ध में बदल दिया था। पांच दिनों तक चले उस संघर्ष में दोनों तरफ से रॉकेट दागे गए, कम से कम 48 लोगों की मौत हुई और करीब 3 लाख लोग विस्थापित हो गए थे। मामला इतना बिगड़ा कि दक्षिण-पूर्व एशिया में शांति बना पाना मुश्किल हो गया। इसी के बाद सितंबर और अक्टूबर में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोशिशें हुईं और अंत में ट्रंप व अनवर की मध्यस्थता में दोनों पक्ष युद्धविराम पर सहमत हुए थे।
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा विवाद कोई नया मुद्दा नहीं है। दोनों देश वर्षों से उस सीमा रेखा पर विवाद में उलझे हैं, जिसका आधार फ्रांसीसी उपनिवेशकाल के समय बनाए गए नक्शे हैं। कई प्राचीन मंदिर, खासकर प्रेह विहियर मंदिर परिसर, दोनों देशों के दावों के केंद्र में हैं। समय-समय पर इन विवादित क्षेत्रों में तनाव भड़कता रहा है, जिसकी कीमत स्थानीय नागरिकों और सीमाई इलाकों को चुकानी पड़ती है।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि यदि जल्द ही अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो यह संघर्ष फिर बड़े पैमाने पर हिंसा में बदल सकता है। दोनों देशों की सेनाओं ने सीमावर्ती क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा तैनात कर दी है, जबकि नागरिकों में भय और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या कूटनीति एक बार फिर दोनों देशों को बातचीत की मेज पर ला पाएगी, या यह विवाद दक्षिण-पूर्व एशिया में नया संकट खड़ा करेगा।
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