आज के दौर में फिट और स्लिम दिखने की चाह इतनी बढ़ गई है कि लोग शॉर्टकट अपनाने से भी नहीं हिचकिचाते। वजन तेजी से कम करने के लिए वेट लॉस की दवाएं एक आसान विकल्प के तौर पर सामने आई हैं। सोशल मीडिया और विज्ञापनों में इन्हें चमत्कारी समाधान की तरह पेश किया जाता है, जिससे कुछ ही हफ्तों में वजन घटता नजर आता है। शुरुआत में वजन कम होता देखकर लोग खुश हो जाते हैं, लेकिन जैसे ही दवाएं बंद की जाती हैं, वजन फिर से तेजी से बढ़ने लगता है। यही वजह है कि आजकल “रीबाउंड वेट गेन” एक आम समस्या बनती जा रही है।
आरएमएल हॉस्पिटल के मेडिसिन विभाग के डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. सुभाष गिरि बताते हैं कि वजन घटाने वाली दवाएं शरीर की प्राकृतिक कार्यप्रणाली में अस्थायी बदलाव करती हैं। कुछ दवाएं भूख को दबाती हैं, तो कुछ मेटाबॉलिज्म को तेज कर देती हैं, जिससे शरीर ज्यादा कैलोरी खर्च करने लगता है। दवाओं के असर से वजन तो कम हो जाता है, लेकिन शरीर असल में यह नहीं सीख पाता कि बिना दवाओं के वजन कैसे कंट्रोल किया जाए। जैसे ही दवा बंद होती है, शरीर अपनी पुरानी स्थिति में लौट आता है और भूख अचानक बढ़ने लगती है।
डॉ. सुभाष गिरि के अनुसार, दवाओं के दौरान शरीर को कम एनर्जी मिलने लगती है। ऐसे में दवा बंद होने पर शरीर एक तरह से “सर्वाइवल मोड” में चला जाता है और ज्यादा फैट जमा करने की कोशिश करता है, ताकि भविष्य में एनर्जी की कमी न हो। इसी वजह से वजन पहले से भी तेजी से बढ़ सकता है। अगर इस दौरान व्यक्ति ने डाइट कंट्रोल और फिजिकल एक्टिविटी की आदत नहीं डाली, तो दवा छोड़ते ही पुरानी लाइफस्टाइल वापस आ जाती है और वजन बढ़ना तय हो जाता है।
सिर्फ दवाओं पर निर्भर रहकर वजन घटाना सेहत के लिए कई तरह से खतरनाक हो सकता है। ऐसी दवाएं भूख, पाचन और हॉर्मोनल सिस्टम को प्रभावित करती हैं, जिससे कमजोरी, थकान, चक्कर और पोषण की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कई मामलों में वजन तो कम हो जाता है, लेकिन मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और शरीर की ताकत घटने लगती है। लंबे समय तक इन दवाओं का सेवन हॉर्मोनल असंतुलन और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी दिक्कतों का कारण भी बन सकता है।
डॉक्टरों का मानना है कि सुरक्षित और टिकाऊ वेट लॉस के लिए दवाओं से ज्यादा जरूरी लाइफस्टाइल में बदलाव है। संतुलित और पोषक आहार, नियमित एक्सरसाइज, पर्याप्त नींद और धैर्य—यही वजन घटाने का सही तरीका है। दवाएं केवल डॉक्टर की सलाह पर और सीमित समय के लिए ही लेनी चाहिए। बिना आदतें बदले सिर्फ दवाओं से किया गया वेट लॉस न तो सुरक्षित है और न ही लंबे समय तक टिकने वाला।
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