मुंबई: हिंदी सिनेमा के हैंडसम और संवेदनशील अभिनेताओं में गिने जाने वाले विनोद मेहरा की ज़िंदगी जितनी चमकदार थी, उतनी ही विवादों से भरी भी रही। 30 अक्टूबर 1990 को महज 45 साल की उम्र में उनका निधन हो गया, लेकिन उन्होंने अमर प्रेम, अनुराग, लाल पत्थर, बेमिसाल और खुद्दार जैसी कई यादगार फिल्में देकर अपने अभिनय की अमिट छाप छोड़ी। विनोद मेहरा की पहचान सिर्फ एक अभिनेता के रूप में नहीं, बल्कि एक सच्चे रोमांटिक के तौर पर भी बनी — और इसी रोमांस ने कभी-कभी उनके करियर को नुकसान भी पहुंचाया।
रेखा संग गुपचुप शादी और विवादों का सिलसिला
विनोद मेहरा का नाम उस दौर की कई अभिनेत्रियों से जुड़ा, लेकिन सबसे चर्चित रिश्ता रेखा के साथ रहा। दोनों ने reportedly कोलकाता में गुपचुप शादी की थी, जिसकी भनक जब मीडिया को लगी तो खूब हंगामा हुआ। कहा जाता है कि यह रिश्ता घरेलू मतभेदों के चलते टूट गया, लेकिन इस प्रेम कहानी ने विनोद मेहरा की छवि पर गहरा असर छोड़ा। रेखा के साथ-साथ बिंदिया गोस्वामी के साथ भी उनके रिश्ते चर्चा में रहे, जिससे वे एक ‘चॉकलेट हीरो’ से कहीं अधिक एक ‘मिस्ट्री मैन’ बन गए।
फिल्म पत्रिका ‘माधुरी’ में दो साल का बैन
विनोद मेहरा की ज़िंदगी का एक दिलचस्प लेकिन कम जाना-पहचाना किस्सा उनका मीडिया से टकराव है। बताया जाता है कि टाइम्स ऑफ इंडिया समूह की हिंदी फिल्म पत्रिका माधुरी में उनके खिलाफ दो साल तक खबरें और तस्वीरें प्रकाशित करने पर रोक लगा दी गई थी। संपादक अरविंद कुमार ने खुद खुलासा किया था कि विनोद मेहरा ने मालिकान के जरिए अपनी खबर छपवाने की सिफारिश करवाई थी — जिसे उन्होंने संपादकीय हस्तक्षेप मानते हुए सख्ती से बैन कर दिया। विनोद मेहरा ने काफी विनती की, लेकिन दो साल तक उनका नाम ‘माधुरी’ के पन्नों से गायब रहा। दिलचस्प बात यह है कि बैन खत्म होते ही उसी पत्रिका ने उनके ऊपर कवर स्टोरी छापी।
कम उम्र में सफलता और अधूरी मंज़िल
विनोद मेहरा ने 10 साल की उम्र से ही फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था और 1971 में तनुजा के साथ एक थी रीता से बतौर हीरो डेब्यू किया। यह फिल्म सुपरहिट रही और विनोद इंडस्ट्री में छा गए। वे राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन जैसे सुपरस्टार्स के दौर में भी अपनी जगह बनाए रखने में सफल रहे। मगर किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया — 45 की उम्र में हार्ट अटैक से उनकी अचानक मौत हो गई।
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