April 18, 2026

फेड के फैसले से हिला शेयर बाजार: 40 मिनट में निवेशकों के डूबे 2.27 लाख करोड़ रुपये

नई दिल्ली: अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ताजा ब्याज दर फैसले ने दुनियाभर के बाजारों में हलचल मचा दी है। फेड ने 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती तो की, लेकिन दिसंबर में किसी और रेट कट की संभावना से साफ इनकार कर दिया। इस अनिश्चितता ने ग्लोबल सेंटिमेंट को झटका दिया, जिसका सीधा असर भारत के शेयर बाजार पर देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों गिरे, और महज 40 मिनट में निवेशकों की 2.27 लाख करोड़ रुपये की पूंजी डूब गई।

कैसे टूटा बाजार का भरोसा?
बाजार को उम्मीद थी कि फेड दिसंबर में भी ब्याज दरों में राहत देगा, जिससे वैश्विक लिक्विडिटी बढ़ेगी। लेकिन चेयरमैन जेरोम पॉवेल की टिप्पणी — कि “2025 में और कटौती की कोई गारंटी नहीं है” — ने निवेशकों को निराश कर दिया। विदेशी निवेशकों ने बुधवार को करीब 2,540 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले, जिससे घरेलू बाजार पर दबाव और बढ़ गया। वहीं, डॉलर के मुकाबले रुपया भी कमजोर हुआ।

शेयरों में आई भारी गिरावट
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स दोपहर तक 460 अंक गिरकर 84,537 पर आ गया, जबकि एनएसई निफ्टी 142 अंकों की गिरावट के साथ 25,911 पर कारोबार कर रहा था। सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में सन फार्मा, भारती एयरटेल, टाटा स्टील और एशियन पेंट्स सबसे ज्यादा गिरे। वहीं एलएंडटी, अडानी पोर्ट्स और मारुति में हल्की बढ़त दर्ज की गई। आईटी, टेलीकॉम और बैंकिंग सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहे, जबकि मिडकैप शेयरों में हल्की तेजी दिखी।

वैश्विक और एशियाई रुझान
एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया और जापान के सूचकांक सकारात्मक रहे, जबकि अमेरिकी बाजार बुधवार को मिश्रित रुख के साथ बंद हुए। ब्रेंट क्रूड में भी 0.22% की गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले बुधवार को भारतीय बाजार 0.45% की बढ़त के साथ बंद हुए थे, लेकिन फेड की टोन बदलते ही सेंटीमेंट पलट गया।

एक्सपर्ट्स का नजरिया
मेहता लिमिटेड के प्रशांत तापसे का कहना है कि पॉवेल की टिप्पणियों ने दिसंबर में दर कटौती की उम्मीदों को कमजोर किया है, जिससे निवेशक सतर्क हो गए हैं। वहीं जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के वीके विजयकुमार के मुताबिक, फेड की यह कटौती पहले से तय थी, इसलिए असर सीमित रहा, लेकिन भविष्य की अस्पष्टता बाजार को खटक रही है। एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि “फेड की सख्त टिप्पणी ने वैश्विक आशावाद को झटका दिया है।”

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