बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। देश के वरिष्ठ हिंदू नेता और पूर्व मंत्री रमेश चंद्र सेन की जेल में हुई मौत ने न सिर्फ बांग्लादेश बल्कि भारत में भी तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा कर दी हैं। इस घटना के बाद विश्व हिंदू परिषद (VHP) के नेता विनोद बंसल ने बांग्लादेश सरकार और वहां की मौजूदा स्थिति पर कड़ा हमला बोला है। उनका कहना है कि अगर एक पूर्व मंत्री जेल में सुरक्षित नहीं है, तो आम हिंदुओं की हालत का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
VHP नेता विनोद बंसल ने बयान देते हुए कहा कि बांग्लादेश की जेलों में न जाने कितने हिंदू अमानवीय हालात में सड़ रहे होंगे। उन्होंने दावा किया कि बीते कुछ महीनों में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं और हाल के दो महीनों में ही करीब दो दर्जन हिंदुओं की चरमपंथियों द्वारा बेरहमी से हत्या की गई है। बंसल ने इन घटनाओं को बर्बरता करार देते हुए कहा कि यह सिलसिला अब एक खतरनाक चलन का रूप लेता जा रहा है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
विनोद बंसल ने बांग्लादेश सरकार पर चुनावी फायदे के लिए कट्टरपंथी ताकतों को खुश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव नजदीक आते ही हिंदुओं को निशाना बनाना यह दर्शाता है कि सरकार जिहादी तत्वों के दबाव में काम कर रही है। उन्होंने यहां तक कहा कि बांग्लादेश अब आईएसआई का कठपुतली बनता जा रहा है और पाकिस्तान के प्रभाव में फंसता दिख रहा है। उनके अनुसार, हाल के राजनीतिक घटनाक्रम और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से दूरी इस ओर इशारा करती है कि बांग्लादेश की नीतियां अब स्वतंत्र नहीं रहीं।
रमेश चंद्र सेन की मौत को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। 85 वर्षीय सेन को वर्ष 2024 में हत्या समेत तीन मामलों में गिरफ्तार किया गया था और वह तभी से जेल में बंद थे। बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे और शुरुआती रिपोर्टों में उनकी मौत का कारण बीमारी बताया गया है। हालांकि, कई मानवाधिकार कार्यकर्ता और हिंदू संगठनों से जुड़े लोग इस दावे को मानने को तैयार नहीं हैं और इसे जेल में हुई संदिग्ध मौत या हत्या करार दे रहे हैं। उनका कहना है कि जेल में अल्पसंख्यक कैदियों के साथ भेदभाव और हिंसा कोई नई बात नहीं है।
इस पूरे मामले ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या वहां की सरकार अपने नागरिकों, खासकर धार्मिक अल्पसंख्यकों को सुरक्षा देने में विफल हो रही है। VHP समेत कई संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय मंचों से इस मुद्दे को उठाने की मांग की है और बांग्लादेश सरकार से आत्ममंथन करने की अपील की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
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