April 17, 2026
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आज सूर्य देव और मंगल मकर राशि में होकर साहस प्रदान करेंगे, जबकि चन्द्र देव तुला राशि में रहकर मानसिक शांति बनाए रखेंगे। बुध देव, शुक्र देव और राहु देव का कुंभ राशि में तथा शनि देव का मीन राशि में होना अनुशासन और बौद्धिक विकास के योग बनाता है।

 

आज फाल्गुन मास की कृष्ण सप्तमी और भानु सप्तमी का संयोग सूर्य देव की उपासना के लिए अत्यंत शुभ है। आज कार्यों का कुशल संचालन करने से सफलता मिलने की पूरी संभावना है। चन्द्र देव स्वाति नक्षत्र में रहेंगे। शुभ कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त का उपयोग करें, जबकि राहुकाल में सावधानी बरतें।

महत्वपूर्ण विवरण

तिथि: कृष्ण सप्तमी – अगले दिन प्रातः 05:01 बजे तक (09 फरवरी)
योग: गण्ड – रात्रि 12:08 बजे तक (09 फरवरी)
करण: विष्टि (भद्रा) – दोपहर 03:54 बजे तक
करण: बव – अगले दिन प्रातः 05:01 बजे तक (09 फरवरी)

सूर्य और चंद्रमा की स्थिति

सूर्योदय का समय: प्रातः 07:05 बजे
सूर्यास्त का समय: सायं 06:06 बजे
चंद्रोदय का समय: रात्रि 12:23 बजे (09 फरवरी)
चंद्रास्त का समय: प्रातः 10:33 बजे

समस्त नव ग्रहों की की राशियां (प्रात: 06: 00 बजे)

सूर्य देव: मकर राशि में स्थित हैं।
चन्द्र देव: तुला राशि में स्थित हैं।
मंगल देव: मकर राशि में स्थित हैं।
बुध देव: कुंभ राशि में स्थित हैं।
गुरु बृहस्पति: मिथुन राशि में स्थित हैं।
शुक्र देव: कुंभ राशि में स्थित हैं।
शनि देव: मीन राशि में स्थित हैं।
राहु देव: कुंभ राशि में स्थित हैं।
केतु देव: सिंह राशि में स्थित हैं।

आज के शुभ मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:13 बजे से दोपहर 12:57 बजे तक
अमृत काल: रात्रि 07:18 बजे से रात्रि 09:04 बजे तक

आज के अशुभ समय

राहुकाल: सायं 04:43 बजे से सायं 06:06 बजे तक
गुलिकाल: दोपहर 03:21 बजे से सायं 04:43 बजे तक
यमगण्ड: दोपहर 12:35 बजे से दोपहर 01:58 बजे तक

आज का नक्षत्र
आज चंद्रदेव स्वाति नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।
स्वाति नक्षत्र: प्रातः 05:02 बजे तक (09 फरवरी)।
सामान्य विशेषताएं: स्वतंत्र स्वभाव, लचीलापन, शिष्टाचार, बुद्धिमत्ता, आत्मसंयम, समाजप्रियता, संवेदनशीलता, शांत स्वभाव, शालीनता और आकर्षक व्यक्तित्व
नक्षत्र स्वामी: राहु देव
राशि स्वामी: शुक्र देव
देवता: पवन देव (पवन के देवता)
प्रतीक: हवा में झुकती हुई एक नई कली

आज भानु सप्तमी है

भानु सप्तमी हिंदू पंचांग की एक पवित्र तिथि मानी जाती है, जो रविवार के दिन पड़ने वाली सप्तमी तिथि को आती है। यह दिन विशेष रूप से सूर्य देव की उपासना के लिए समर्पित होता है। मान्यता है कि भानु सप्तमी के दिन विधिपूर्वक सूर्य को अर्घ्य देने से स्वास्थ्य, तेज और आत्मबल में वृद्धि होती है। इस दिन व्रत रखने और सूर्य मंत्रों का जप करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा रोग और मानसिक अशांति से मुक्ति मिलती है। सूर्य को जल अर्पित कर दिन की शुरुआत करना भानु सप्तमी का मुख्य महत्व माना गया है।

 

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