यूपी विधानसभा बजट सत्र: सत्ता और विपक्ष के बीच गरमाया सत्र, आरक्षण और निजीकरण पर जोरदार बहस

यूपी विधानमंडल का बजट सत्र सोमवार को तेज़ी से आगे बढ़ा, जब विधानसभा में सत्ता और विपक्ष के बीच तीव्र बहस हुई। इस दिन के प्रश्नकाल में सत्ता पक्ष के नेताओं ने विपक्ष के सवालों का जवाब दिया और राज्य के महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की। विधानसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई, जिसमें बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया। मंत्री ने कहा कि आरटीई (राइट टू एजुकेशन) के तहत निजी स्कूलों में शुल्क प्रतिपूर्ति में वृद्धि का सरकार का कोई विचार नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस संबंध में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

वहीं, विधान परिषद में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया। मौर्य ने जोर देते हुए कहा, “जब तक भाजपा की डबल इंजन की सरकार है, कोई भी माई का लाल आरक्षण नहीं छीन सकता है।” वे सदन में सपा के सदस्यों द्वारा निजीकरण के खिलाफ लाए गए कार्यस्थगन प्रस्ताव पर बोल रहे थे। मौर्य का यह बयान विधान परिषद में तकरार का कारण बना, जहां सपा के नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने आरोप लगाया कि सरकार का निजीकरण का कदम आरक्षण को खत्म करने की साजिश है।

सपा के डॉ. मान सिंह यादव ने भी निजीकरण के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया दी और आरोप लगाया कि यह छिपा एजेंडा है, जिसका उद्देश्य आरक्षण को समाप्त करना है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “कुंभ के दौरान दिल्ली से प्रयागराज का किराया दिल्ली से लंदन तक के किराए से महंगा हो गया था। इसी निजीकरण का नतीजा है कि केंद्रीय कृषि मंत्री को टूटी सीट पर सफर करना पड़ा।”

लाल बिहारी यादव ने अपने बयान में यह भी कहा कि सरकारी विभागों के निजीकरण से नौकरी की कोई गारंटी नहीं रह जाएगी, जो युवाओं के लिए खतरे की घंटी है।

इस पर केशव प्रसाद मौर्य ने अपनी पार्टी की विचारधारा को स्पष्ट करते हुए कहा, “सपा के लिए व्यक्ति और परिवार के बाद पार्टी और देश है, जबकि हमारी विचारधारा में देश सबसे ऊपर है। उसके बाद दल और व्यक्ति का नंबर आता है।” मौर्य ने यह भी याद दिलाया कि नोएडा में बिजली का निजीकरण मुलायम सिंह यादव की सरकार में हुआ था, और यह मुद्दा केवल राजनीति का हिस्सा बन चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि गंगा का जल प्रदूषित होता, तो सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उस में डुबकी कैसे लगाते? उनका कहना था कि प्रदूषण गंगा में नहीं, बल्कि सपा के लोगों के मन में है।

इस दौरान विधानमंडल के दोनों सदनों की कार्यवाही में जोरदार बहस जारी रही, जो 5 मार्च तक चलेगी। इस बीच सदन में उठाए गए तमाम मुद्दों पर चर्चा जारी रहेगी, जिनमें शिक्षा, निजीकरण और आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण सवाल शामिल हैं।

यूपी विधानमंडल का यह बजट सत्र कई सवालों और विवादों के साथ आगे बढ़ रहा है, और अगले कुछ दिन में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच की यह तनातनी किसी हल तक पहुंच पाती है या नहीं।

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