ट्रंप का ‘बोर्ड ऑफ पीस’: गाजा के पुनर्निर्माण के लिए नई अंतरराष्ट्रीय पहल, भारत को भी मिला न्योता
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजराइल–हमास युद्ध के बाद तबाह हो चुके गाजा के पुनर्निर्माण और वहां की शासन व्यवस्था को संभालने के लिए एक नया अंतरराष्ट्रीय संगठन बनाया है, जिसका नाम ‘बोर्ड ऑफ पीस’ रखा गया है। इस बोर्ड का उद्देश्य युद्धविराम के बाद गाजा में स्थायी शांति, सुरक्षा और विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना बताया जा रहा है। इसी कड़ी में भारत को भी इस बोर्ड में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया गया है, जिसे वैश्विक कूटनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
गौरतलब है कि इजराइल और हमास के बीच लंबे समय तक चले संघर्ष में गाजा पूरी तरह तबाह हो गया था। हजारों लोगों की जान गई, लाखों लोग बेघर हुए और बुनियादी ढांचा खंडहर में तब्दील हो गया। इसी पृष्ठभूमि में ट्रंप ने 20 प्वाइंट पीस डील पेश की थी, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच सीजफायर संभव हो पाया। अब इसी शांति समझौते को जमीन पर उतारने और गाजा को दोबारा खड़ा करने के लिए बोर्ड ऑफ पीस की स्थापना की गई है।
ट्रंप के अनुसार, यह बोर्ड एक अस्थायी अंतरराष्ट्रीय प्रशासन की तरह काम करेगा। इसका काम गाजा को हथियारों से मुक्त करना, मानवीय सहायता की निगरानी करना, स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास जैसी बुनियादी सेवाओं को बहाल करना और आर्थिक निवेश के जरिए रोजगार के अवसर पैदा करना होगा। बोर्ड गाजा में एक तकनीकी फिलिस्तीनी प्रशासन की स्थापना में भी मदद करेगा, ताकि वहां स्थानीय स्तर पर शासन व्यवस्था दोबारा मजबूत हो सके।
इस बोर्ड की अध्यक्षता खुद डोनाल्ड ट्रंप करेंगे। इसमें अमेरिका के वरिष्ठ नेता, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रमुख और कई देशों के प्रतिनिधि शामिल किए गए हैं। विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और ट्रंप के करीबी सहयोगी जैरेड कुश्नर जैसे नाम भी इससे जुड़े बताए जा रहे हैं। इसके अलावा एक अलग गाजा प्रशासनिक समिति और एक एग्जीक्यूटिव बोर्ड भी गठित किया जाएगा, जो जमीनी स्तर पर फैसलों को लागू करेगा।
भारत के साथ-साथ अर्जेंटीना, कनाडा, मिस्र, तुर्की, यूएई और पाकिस्तान समेत कई देशों को इस पहल में शामिल होने का न्योता दिया गया है। हालांकि, बोर्ड को लेकर यह भी चर्चा है कि स्थायी सदस्य बनने के लिए देशों को भारी आर्थिक योगदान देना होगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्थायी सदस्यता के लिए करीब 1 अरब डॉलर का फंड देने की शर्त रखी गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि भारत समेत अन्य देश इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाते हैं और यह बोर्ड गाजा में शांति बहाली में कितना कारगर साबित होता है।
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