अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की हालिया वॉशिंगटन बैठक ने दोनों देशों के संबंधों में ऐतिहासिक मोड़ ला दिया है। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब कुछ वर्षों पहले तक अमेरिकी प्रशासन सऊदी नीतियों और मानवाधिकार मुद्दों को लेकर कठोर रुख अपना रहा था। खासतौर पर पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या के बाद बाइडन प्रशासन ने सऊदी से दूरी बनाने की बात कही थी। लेकिन ओवल ऑफिस में हुए इस नए अध्याय ने स्पष्ट कर दिया कि ट्रंप प्रशासन अब सऊदी अरब को फिर से अपने सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारों में शामिल करना चाहता है।
बैठक के दौरान अमेरिका ने सऊदी अरब को कई बड़े रक्षा और तकनीकी सौदों की मंजूरी दे दी। इनमें सबसे बड़ा फैसला सऊदी को F-35 लड़ाकू विमानों की बिक्री है, जो अब तक सिर्फ चुनिंदा अमेरिकी सहयोगी देशों को ही उपलब्ध कराए जाते हैं। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच एक नया रणनीतिक रक्षा समझौता भी तैयार किया गया, जिसके तहत सुरक्षा, सैन्य तकनीक और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर व्यापक सहयोग शामिल है। वॉशिंगटन ने सऊदी अरब को मेजर नॉन-नाटो एलाय (MNNA) का दर्जा देने की भी घोषणा की, जो किसी भी देश की सुरक्षा साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में सबसे अहम कदम माना जाता है।
इस मुलाकात का दूसरा बड़ा पहलू तकनीकी साझेदारी रहा। सऊदी अरब अपनी अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से हटाकर नई तकनीकों, विशेषकर AI, रोबोटिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा की ओर ले जाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है। इसी दिशा में अमेरिका और सऊदी अरब ने एक AI सहयोग ढांचा शुरू किया है, जिसके तहत सऊदी को अत्याधुनिक AI चिप्स, डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की अनुमति दी गई है। इसके साथ ही दोनों देशों ने एक महत्वपूर्ण खनिज समझौता किया और शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। यह सब सऊदी की ‘विजन 2030’ योजना को तेजी देने वाला कदम माना जा रहा है।
सौदों के बावजूद सबसे बड़ा परिवर्तन एक राजनीतिक मोर्चे पर आया। अमेरिका लंबे समय से सऊदी अरब पर दबाव डालता रहा था कि वह इजराइल के साथ पूर्ण राजनयिक सामान्यीकरण को बड़े रक्षा सौदों की शर्त बनाए। लेकिन इस बार ट्रंप प्रशासन ने इस शर्त को हटा दिया, जिससे सऊदी अरब बिना किसी अतिरिक्त राजनीतिक प्रतिबद्धता के इन समझौतों को हासिल कर सका। यह रुख पिछले साल की तुलना में बिल्कुल उलट है, जब बाइडन प्रशासन ने सामान्यीकरण, फिलिस्तीनी राज्य के लिए रास्ता और द्विपक्षीय रक्षा समझौते — तीनों को एकसाथ आगे बढ़ाने की अनिवार्य शर्त बताया था।
बैठक के अंत में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने वॉशिंगटन में ट्रंप के साथ बैठकर इसे सऊदी-अमेरिका संबंधों के “इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण समय” बताया। उनकी बातों से स्पष्ट था कि यह मुलाकात सिर्फ कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि आने वाले कई वर्षों के रणनीतिक ढांचे को तय करने वाला निर्णायक मोड़ बन गई है।
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