April 30, 2026

पुतिन-ट्रंप की मुलाकात से पहले खुलासा, यूक्रेन युद्ध में मारे गए रूस के सवा लाख सैनिक

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की 15 अगस्त को अलास्का में होने वाली पहली मुलाकात से पहले एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। रूसी स्वतंत्र मीडिया मेडियाजोना और बीबीसी रूसी सर्विस की संयुक्त जांच के अनुसार, यूक्रेन में पिछले तीन साल से जारी युद्ध में अब तक 1,21,507 रूसी सैन्यकर्मियों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।

 

यह आंकड़े 24 फरवरी 2022 से 31 जुलाई 2025 के बीच के हैं। जुलाई की शुरुआत के बाद से ही 2,353 और रूसी सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। यह डेटा अखबारों में छपी खबरों, रिश्तेदारों के सोशल मीडिया पोस्ट, स्मृति स्थलों, स्थानीय मीडिया रिपोर्ट और प्रशासनिक बयानों जैसी सार्वजनिक जानकारी पर आधारित है। चूंकि मॉस्को और कीव दोनों ही अपने नुकसान के आधिकारिक आंकड़े बहुत कम जारी करते हैं, इसलिए अनुमान है कि वास्तविक हताहतों की संख्या काफी अधिक होगी। यूक्रेन का दावा है कि रूस के कुल हताहत 10 लाख से भी ज्यादा हो चुके हैं।

 

रिपोर्ट के अनुसार, मारे गए सैनिकों में 33,100 स्वयंसेवक, 18,000 जेल से भर्ती कैदी, 13,300 जबरन भर्ती सैनिक और 5,400 से ज्यादा अफसर शामिल हैं। यूक्रेन के युद्धबंदी मामलों के मुख्यालय के मुताबिक, 12 जून तक 1 लाख से अधिक रूसी परिवार अपने लापता सैनिकों की जानकारी के लिए यूक्रेनी पहल से संपर्क कर चुके हैं। 12 अगस्त तक, यूक्रेन की जनरल स्टाफ का अनुमान है कि रूस ने 10,65,220 सैनिक खोए हैं, जो पश्चिमी खुफिया एजेंसियों के आकलन से मेल खाते हैं।

 

युद्ध में जुलाई के महीने के नुकसान को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि रूस का नुकसान, यूक्रेन की तुलना में करीब तीन गुना है, हालांकि उन्होंने अपने देश के आंकड़े साझा नहीं किए। वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने दावा किया कि सिर्फ जुलाई में ही 60,000 रूसी सैनिक मारे गए, जबकि राष्ट्रपति ट्रंप ने यह संख्या करीब 20,000 बताई।

 

इन आंकड़ों का सामने आना पुतिन-ट्रंप वार्ता को और भी संवेदनशील बना सकता है, क्योंकि यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब रूस-यूक्रेन युद्ध का मानवीय और सैन्य संकट अपने चरम पर है और दोनों देशों के बीच संघर्ष थमने के कोई संकेत नहीं हैं।

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