गाजा में भुखमरी के साथ बढ़ा बीमारियों का खतरा, दवाइयों पर असर न होने से मौतों का सिलसिला जारी
गाजा में जारी युद्ध ने लोगों को पहले ही भुखमरी और तबाही के कगार पर पहुंचा दिया है, लेकिन अब हालात और भी गंभीर हो गए हैं। प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल The Lancet Infectious Diseases की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि गाजा में ऐसी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं जो एंटीबायोटिक दवाओं पर असर नहीं कर रहीं। इसका मतलब है कि इलाज मुश्किल हो रहा है, मरीज लंबे समय तक बीमार रह रहे हैं और मौत का खतरा बढ़ता जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2023 से शुरू हुई जंग के बाद पहली बार गाजा में मल्टी-ड्रग-रेजिस्टेंट बैक्टीरिया का बड़े पैमाने पर प्रकोप देखने को मिला है। इन बैक्टीरिया पर कई तरह की दवाओं का असर नहीं हो रहा, जिससे घाव और संक्रमण जल्दी ठीक नहीं हो रहे। Lancet की टीम ने अल अहली अस्पताल से 1300 से ज्यादा सैंपल लिए, जिनमें से दो-तिहाई में दवा-रोधी बैक्टीरिया पाए गए। ज्यादातर केस उन लोगों के थे जो हवाई हमलों या विस्फोट में घायल हुए थे।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि अगर गाजा में मेडिकल सप्लाई का पर्याप्त स्टॉक नहीं पहुंचा, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। फिलहाल आधी से ज्यादा दवाइयां खत्म हो चुकी हैं, अस्पताल 240% से ज्यादा क्षमता पर भरे हुए हैं और केवल आधे ही अस्पताल व क्लिनिक आंशिक रूप से काम कर पा रहे हैं।
रिसर्च टीम का कहना है कि अगर युद्ध और अस्पतालों पर हमले नहीं रुके, साथ ही पानी के प्लांट को सुरक्षित नहीं किया गया, तो दवा-रोधी संक्रमण का यह संकट और भी तेजी से फैल सकता है। यह स्थिति सिर्फ गाजा ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंता का कारण बन सकती है, क्योंकि ऐसे बैक्टीरिया सीमाओं के पार भी फैल सकते हैं।
पिछले 22 महीनों में गाजा में 60 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों घायल हैं। पहले मौतें बमबारी और भूख से हो रही थीं, लेकिन अब साधारण संक्रमण भी जानलेवा साबित हो रहे हैं, जो मानवीय संकट को और गहरा कर रहे हैं।
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