April 24, 2026

“तीन दिन से बंद था कमरा, जब दरवाज़ा टूटा तो अंदर बिखरा था एक खौफनाक सच — एक पिता, दो मासूम और मौत की ख़ामोशी”

तेलंगाना के संगारेड्डी जिले से एक ऐसी वारदात सामने आई है जिसने पुलिस से लेकर पूरे इलाके तक को झकझोर कर रख दिया है। जिस घर में कभी बच्चों की खिलखिलाहट गूंजती थी, वहां अब सिर्फ मौत की खामोशी रह गई है। तीन दिन तक बंद पड़े एक कमरे से उठती दुर्गंध ने एक खौफनाक सच्चाई की परतें खोलीं—एक ही कमरे में तीन लाशें सड़ रही थीं। एक पिता और उसके दो मासूम बच्चों की ज़िंदगियां एक साथ खत्म हो चुकी थीं, और कोई जान तक नहीं पाया।

यह दर्दनाक घटना संगारेड्डी जिले के कोंडापुर थाना क्षेत्र की है। जब सोमवार को इलाके के लोगों ने एक घर से लगातार आ रही बदबू की शिकायत पुलिस से की, तो किसी को अंदाज़ा नहीं था कि वो दरवाज़ा खुलने पर किस भयानक मंजर का सामना करेंगे। पुलिस जब मौके पर पहुंची और दरवाज़ा तोड़ा, तो भीतर का नज़ारा दिल दहला देने वाला था—कमरे में तीन लाशें पड़ी थीं। एक मृत पुरुष, और उसके पास दो मासूम बच्चों के निर्जीव शव। लाशों की हालत देखकर पुलिस ने अंदाज़ा लगाया कि यह घटना तीन दिन पहले की है।

मृतकों की पहचान 38 वर्षीय सुभाष, उसके 13 वर्षीय बेटे ऋतिक और 9 वर्षीय बेटी आराध्या के रूप में हुई है। सुभाष एक निजी अस्पताल में लैब टेक्नीशियन के तौर पर काम करता था। शुरुआती जांच में पुलिस को शक है कि सुभाष ने पहले अपने दोनों बच्चों को मौत के घाट उतारा और फिर खुद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। हालांकि, इस भयावह कदम के पीछे की वजह अब तक पूरी तरह साफ नहीं हो सकी है।

कोंडापुर पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर ने बताया कि शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि सुभाष और उसकी पत्नी के बीच लंबे समय से रिश्तों में तनाव चल रहा था। कुछ दिनों पहले दोनों के बीच किसी बात को लेकर गंभीर झगड़ा हुआ था, जिसके बाद उसकी पत्नी घर छोड़कर चली गई थी। संभावना है कि इसी पारिवारिक तनाव और मानसिक दबाव में आकर सुभाष ने यह खौफनाक कदम उठाया हो। हालांकि, अभी इस एंगल की पूरी गहराई से जांच की जा रही है।

जिस वक्त यह त्रासदी घटी, उस वक्त सुभाष अकेले बच्चों के साथ घर में था। तीनों की मौत के बाद तीन दिन तक कमरे का दरवाज़ा बंद रहा। इस बीच लाशें सड़ने लगीं, और बदबू पूरे मोहल्ले में फैलने लगी। पड़ोसियों को जब शक हुआ तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने जब दरवाज़ा तोड़ा तो सामने जो दृश्य था, उसने सभी को भीतर तक हिला दिया।

पुलिस ने तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और पूरे मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। साथ ही, फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया है ताकि तकनीकी साक्ष्यों के ज़रिए यह पुष्टि की जा सके कि घटनाक्रम वास्तव में आत्महत्या और हत्या का था, या फिर इसके पीछे कोई और वजह छुपी है।

इंस्पेक्टर का कहना है कि यह मामला जितना सीधा दिख रहा है, उतना है नहीं। बहुत से सवाल हैं जो अभी अनसुलझे हैं—क्या सुभाष मानसिक रूप से अस्थिर था? क्या उसने बच्चों की हत्या करने से पहले कुछ और लोगों से संपर्क किया था? पत्नी के साथ झगड़े की असल वजह क्या थी? क्या बच्चों को ज़हर दिया गया या किसी अन्य तरीके से मारा गया? इन सभी पहलुओं पर जांच जारी है।

इस घटना ने न सिर्फ इलाके के लोगों को सदमे में डाल दिया है, बल्कि एक बार फिर यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि पारिवारिक कलह कब और कैसे एक ज़िंदगी को नर्क में बदल सकता है। दो मासूम बच्चे, जिनकी आंखों में सपने थे, उनकी ज़िंदगी किसी और की ज़िम्मेदारी और फैसले की भेंट चढ़ गई।

फिलहाल पुलिस मामले की हर एंगल से गहन जांच कर रही है और मृतकों के रिश्तेदारों व पड़ोसियों से भी पूछताछ की जा रही है, ताकि सच सामने आ सके। लेकिन इस खामोश घर की दीवारें अब भी चीख-चीख कर सिर्फ एक ही बात कह रही हैं—”काश, कोई पहले सुन लेता तो शायद ये तीन ज़िंदगियाँ बच जातीं…”

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