क्या भारत 10 या 11 मई को पाकिस्तान पर हमला करेगा? पूर्व पाक उच्चायुक्त ने फिर उड़ाई सनसनी, दिल्ली की चुप्पी ने और बढ़ाया तनाव
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए दिल दहला देने वाले आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनातनी अब अपने चरम पर है। 22 अप्रैल को हुए इस हमले में 26 हिंदू तीर्थयात्रियों की निर्मम हत्या के बाद भारत का गुस्सा साफ झलक रहा है। दिल्ली की तरफ से अब तक कड़े राजनयिक कदम उठाए जा चुके हैं—वीज़ा सेवाएं निलंबित, राजनयिकों की वापसी, सिंधु जल संधि पर पुनर्विचार और एयरस्पेस बंद करने जैसे निर्णय पहले ही लिए जा चुके हैं। लेकिन अब सबकी नज़र एक सवाल पर टिक गई है: क्या भारत अब सैन्य जवाब की तैयारी में है?
इसी बीच पाकिस्तान में अफवाहों और आशंकाओं की आंधी तेज हो गई है। पाकिस्तानी नेता, पत्रकार और पूर्व डिप्लोमैट्स लगातार भारत द्वारा संभावित सैन्य कार्रवाई की तारीखों के अनुमान लगा रहे हैं। अब इस सिलसिले में सबसे चौंकाने वाला दावा पाकिस्तान के भारत में पूर्व उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने किया है। बासित ने कहा है कि भारत 10 या 11 मई को पाकिस्तान के खिलाफ “सीमित सैन्य कार्रवाई” कर सकता है। यह दावा उन्होंने सोशल मीडिया पर किया, जिसके बाद इस्लामाबाद से लेकर न्यूयॉर्क तक कई हलकों में हलचल मच गई।
लेकिन क्या यह दावा केवल एक रणनीतिक चाल है? क्या पाकिस्तान जानबूझकर ‘प्रोपेगेंडा वॉर’ के जरिए वैश्विक सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रहा है? भारतीय खुफिया और रणनीतिक मामलों के जानकारों का यही मानना है।
विश्लेषकों के अनुसार, भारत की असली कार्रवाई कब और कैसी होगी, इसकी जानकारी सिर्फ चुनिंदा लोगों के पास होती है और ऐसी संवेदनशील सूचनाएं सार्वजनिक रूप से कभी साझा नहीं की जातीं। ऐसे में अब्दुल बासित का यह दावा केवल एक मनोवैज्ञानिक युद्ध (Psychological Warfare) का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुदाय में पाकिस्तान को ‘पीड़ित’ के रूप में पेश करना है।
ऐसे प्रोपेगेंडा वॉर की मिसाल हाल ही में रूस-यूक्रेन संघर्ष में भी देखने को मिली थी। वहां यूक्रेन लगातार यह दावा करता रहा कि रूस कब हमला करेगा और कैसे करेगा, ताकि वह दुनिया भर में सहानुभूति हासिल कर सके। पाकिस्तान की कोशिशें भी इसी दिशा में जाती दिख रही हैं, और इसमें उसे कुछ हद तक पश्चिमी मीडिया का भी समर्थन मिलता रहा है, जो अक्सर भारत के बजाय पाकिस्तान की स्थिति को ज्यादा तवज्जो देता है।
बासित ने यह दावा भी जोड़ा कि भारत यह हमला रूस में 9 मई को होने वाले विजय उत्सव के बाद कर सकता है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले थे, लेकिन पहलगाम हमले के चलते उन्होंने अपनी रूस यात्रा रद्द कर दी। इस रद्दीकरण को भी अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों ने गंभीरता से लिया है और इसे भारत की गहराती रणनीतिक तैयारी का संकेत माना जा रहा है।
इस बीच भारत और पाकिस्तान दोनों तरफ सैन्य गतिविधियाँ भी तेज़ हो चुकी हैं। पाकिस्तान ने अब्दाली मिसाइल (450 किमी रेंज) का परीक्षण कर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है, तो भारत ने भी देश के कई हिस्सों में सुरक्षा अभ्यास और सैनिकों की तैनाती तेज कर दी है।
मौके की नज़ाकत को देखते हुए ईरान के वरिष्ठ राजनयिक अब्बास अराघची ने भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की पेशकश की है। लेकिन भारत के पूर्व राजनयिक कंवल सिब्बल ने इस ऑफर को सिरे से खारिज करने की सलाह दी है। उनका कहना है कि ईरान की न तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई विश्वसनीयता है और न ही वह भारत के लिए निष्पक्ष मध्यस्थ हो सकता है, क्योंकि ईरानी नेतृत्व शुरू से ही कश्मीर मुद्दे पर भारत विरोधी रुख अपनाता रहा है।
फिलहाल, भारत की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है जो इस हमले की तारीख या रणनीति की पुष्टि करता हो। लेकिन चुप्पी भी एक रणनीति होती है, और यही चुप्पी पाकिस्तान को बेचैन किए हुए है।
अब निगाहें टिकी हैं 10 और 11 मई पर—क्या यह अब्दुल बासित का एक और मनोवैज्ञानिक भ्रम है, या भारत वाकई निर्णायक कदम उठाने वाला है? जवाब आने वाले कुछ दिनों में साफ हो सकता है, लेकिन इतना तय है कि दक्षिण एशिया एक बार फिर एक बड़े मोड़ पर खड़ा है।
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