7 मई को पूरे देश में बजेगा सायरन, डूब जाएंगे शहर अंधेरे में – तैयार रहिए युद्ध जैसे हालात के अभ्यास के लिए
कल्पना कीजिए – अचानक पूरे शहर की बिजली चली जाए, सायरन की तेज आवाज़ गूंजने लगे, लोग अपने घरों से बाहर निकलकर शरण स्थलों की ओर दौड़ने लगें, और आसमान में सैनिक हेलिकॉप्टर मंडराने लगें। 7 मई 2025 को यह कोई फिल्मी दृश्य नहीं, बल्कि भारत के 244 जिलों में एक वास्तविक अभ्यास होगा। सरकार की तरफ से घोषित राष्ट्रीय सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल युद्ध जैसे हालात में आम नागरिकों की तैयारी को परखने के लिए आयोजित की जा रही है, जो अब तक की सबसे व्यापक सुरक्षा रिहर्सल मानी जा रही है।
आखिर क्यों जरूरी हुआ ये मॉक ड्रिल?
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया। इस हमले में 26 भारतीय सैलानी मारे गए थे और जांच में पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठनों का हाथ सामने आया। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुरक्षा पर कई हाई-लेवल मीटिंग्स कीं और स्पष्ट कहा – “साजिश रचने वालों को ऐसी सज़ा दी जाएगी, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी।” उसी के बाद केंद्र सरकार ने पूरे देश में नागरिक सुरक्षा को मज़बूत करने का फैसला लिया।
कैसा होगा यह अभ्यास?
यह मॉक ड्रिल सामान्य अभ्यास से कहीं अलग होगी। इसमें हवाई हमले के सायरन, ब्लैकआउट (बिजली बंद), शरण स्थलों की ओर इवैकुएशन, प्राथमिक चिकित्सा, और गिरकर-छिपने (Drop and Cover) जैसी गतिविधियां शामिल होंगी। संवेदनशील संस्थानों जैसे सैन्य बेस, संचार टावरों और ऊर्जा संयंत्रों को छलावरण (Camouflage) के जरिए दुश्मन की निगाहों से छिपाया जाएगा।
यह अभ्यास केवल सरकारी एजेंसियों तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें स्थानीय प्रशासन, सिविल डिफेंस वार्डन, होम गार्ड्स, NCC, NSS, NYKS और स्कूल-कॉलेजों के छात्र भी शामिल होंगे। उन्हें आपातकालीन हालात में जनता को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, घबराहट से निपटने और सामूहिक संयम बनाए रखने की ट्रेनिंग दी जाएगी।
मंत्रालय ने राज्यों से मांगी रिपोर्ट
गृह मंत्रालय ने 2 मई को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि 7 मई की मॉक ड्रिल में हर स्तर पर भागीदारी सुनिश्चित की जाए और इसके बाद एक “एक्शन टेकन रिपोर्ट” सौंपनी होगी, जिसमें अभ्यास से जुड़ी चुनौतियां, निष्कर्ष और सुधार के सुझाव शामिल होंगे। खासकर सीमावर्ती और तटीय क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है।
ब्लैकआउट – 1971 की रणनीति की वापसी
इस ड्रिल के दौरान रात में शहरों की बिजली काटी जाएगी, जिससे दुश्मन की हवाई निगरानी से बचा जा सके। इस रणनीति का उपयोग आखिरी बार 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के समय किया गया था, जब शहरों को अंधेरे में रखकर दुश्मन के बमवर्षकों को गुमराह किया गया था।
एक नई चेतना की शुरुआत
यह मॉक ड्रिल केवल युद्ध जैसी स्थिति का अभ्यास नहीं, बल्कि एक नई चेतना का प्रतीक है। यह साबित करता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सेना की नहीं, बल्कि आम नागरिक की भी ज़िम्मेदारी है। जब हर नागरिक जानता है कि संकट के समय उसे क्या करना है, तो देश सामूहिक रूप से मज़बूत बनता है।
सिविल डिफेंस रूल्स 1968 के तहत ऐतिहासिक पहल
यह मॉक ड्रिल सिविल डिफेंस रूल्स 1968 के तहत की जा रही है, जिसमें नागरिकों को युद्ध और आपातकालीन हालात में प्रशिक्षित करने की व्यवस्था है। भारत-पाकिस्तान सीमा के पास फिरोजपुर छावनी में इसकी एक झलक पहले ही दिखाई जा चुकी है, जहां 30 मिनट की ब्लैकआउट ड्रिल आयोजित की गई थी।
निष्कर्ष – जागरूक नागरिक, सुरक्षित राष्ट्र
आज जब वैश्विक परिस्थितियां लगातार अस्थिर होती जा रही हैं, भारत का यह कदम बताता है कि देश अब सिर्फ प्रतिक्रिया देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पहले से सतर्क और तैयार रहेगा। यह अभ्यास देश को यह याद दिलाता है कि रक्षा की पहली दीवार अब सिर्फ बॉर्डर पर नहीं, बल्कि हर घर के अंदर
7 मई को भारत के 244 जिलों में युद्ध जैसी स्थिति का अभ्यास: जानिए किन-किन शहरों में होगा ब्लैकआउट और सायरन
7 मई 2025 को, भारत सरकार एक अभूतपूर्व राष्ट्रीय सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल आयोजित करने जा रही है, जिसमें देश के 244 जिलों में युद्ध जैसी स्थिति का अभ्यास किया जाएगा। इस अभ्यास का उद्देश्य नागरिकों की आपातकालीन स्थितियों में तैयारियों की जांच करना है।
उत्तर प्रदेश में शामिल जिले:
उत्तर प्रदेश सरकार ने गृह मंत्रालय के निर्देशानुसार राज्यव्यापी मॉक ड्रिल की तैयारी शुरू कर दी है। इस अभ्यास में निम्नलिखित जिले शामिल होंगे:
लखनऊ
वाराणसी
प्रयागराज
मेरठ
नोएडा
गाजियाबाद
कानपुर
आगरा
गोरखपुर
बरेली
झांसी
अलीगढ़
मुरादाबाद
सहारनपुर
फैजाबाद
आजमगढ़
बस्ती
बलिया
मथुरा
सुल्तानपुर
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