दुनिया के वो देश जहां एक रुपये का भी टैक्स नहीं देना पड़ता, फिर भी इकोनॉमी है मजबूत
दुनिया में कई ऐसे देश हैं जहां आम लोगों को अपनी कमाई का एक भी हिस्सा सरकार को टैक्स के रूप में नहीं देना पड़ता। भारत जैसे देश में जहां आयकर की ऊंची दरें 30-39 फीसदी तक जाती हैं, वहीं कुछ देश ऐसे हैं जहां इनकम टैक्स जैसी कोई चीज नहीं होती। इसके बावजूद उन देशों की अर्थव्यवस्था न केवल स्थिर है बल्कि कुछ तो दुनिया की सबसे समृद्ध अर्थव्यवस्थाओं में गिने जाते हैं। सवाल उठता है कि जब सरकार को आयकर से आमदनी नहीं होती, तो वे अपने खर्च कैसे चलाते हैं? इसका जवाब छिपा है उन देशों की प्राकृतिक संपदा, पर्यटन उद्योग और अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में।
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) इस सूची में सबसे ऊपर आता है। दुबई और अबू धाबी जैसे शहरों में हर साल लाखों पर्यटक आते हैं, जिससे होटल, शॉपिंग और लग्जरी सेवाओं से भारी राजस्व सरकार को मिलता है। साथ ही, तेल और गैस से भी अरबों डॉलर की कमाई होती है। यही वजह है कि यहां किसी भी व्यक्ति को डायरेक्ट टैक्स नहीं देना पड़ता।
बहरीन और कुवैत भी टैक्स-फ्री खाड़ी देशों में शामिल हैं। बहरीन की मजबूत बैंकिंग व्यवस्था और कुवैत की विशाल तेल संपदा सरकार के लिए आय के प्रमुख स्रोत हैं। यहां इनकम टैक्स जैसी व्यवस्था का कोई नामोनिशान नहीं है।
सऊदी अरब में भी यही मॉडल अपनाया गया है। वहां इनकम टैक्स नहीं है, लेकिन वैट और दूसरे अप्रत्यक्ष करों से सरकार अपना खजाना भरती है। तेल उत्पादन और निर्यात इस देश को आर्थिक रूप से इतना समृद्ध बनाते हैं कि टैक्स की जरूरत ही महसूस नहीं होती।
दूसरी ओर, कैरिबियन क्षेत्र में स्थित द बहमास एक ऐसा देश है जहां की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर आधारित है। समुद्रतटीय खूबसूरती, लग्जरी रिसॉर्ट्स और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों से होने वाली आय से सरकार अपने अधिकतर खर्च पूरे कर लेती है। यहां के नागरिक भी किसी तरह का टैक्स नहीं देते।
ब्रुनेई, ओमान और कतर जैसे देश भी इसी व्यवस्था को अपनाते हैं। इनकी अर्थव्यवस्था तेल और गैस के बड़े भंडार पर आधारित है। खास बात ये है कि इन देशों की जनसंख्या कम है, जिससे सरकार की जिम्मेदारियां सीमित रहती हैं और संसाधनों से प्राप्त आय काफी होती है।
मोनाको, यूरोप का एक छोटा लेकिन बेहद समृद्ध देश है, जो टैक्स फ्री होने के बावजूद पर्यटन, रियल एस्टेट और इन्वेस्टमेंट सेक्टर से बड़ी कमाई करता है। वहीं, दक्षिण प्रशांत महासागर का नन्हा द्वीप राष्ट्र नौरू फॉस्फेट माइनिंग से होने वाली आय के चलते अपने नागरिकों से कोई टैक्स नहीं वसूलता।
इन देशों की टैक्स-फ्री व्यवस्था का सबसे बड़ा आधार उनके प्राकृतिक संसाधनों की समृद्धि है। तेल, गैस और पर्यटन जैसे क्षेत्र उनकी कमाई का प्रमुख जरिया हैं। इसके साथ-साथ वैट, सर्विस टैक्स, एक्सपोर्ट शुल्क जैसे अप्रत्यक्ष करों से भी सरकारें अच्छी-खासी आमदनी जुटा लेती हैं। यही कारण है कि इन देशों की अर्थव्यवस्थाएं मजबूत बनी रहती हैं और नागरिकों को आयकर जैसी सीधी कर-व्यवस्था से राहत मिलती है।
ऐसे में ये देश दुनिया के उन चुनिंदा उदाहरणों में शामिल हैं, जहां बिना टैक्स वसूली के भी प्रशासन और विकास की व्यवस्था प्रभावी रूप से संचालित हो रही है।
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