क्या रक्षा शेयरों में तेजी आगे भी जारी रहेगी या अब दिखेगी गिरावट? जानिए रिपोर्ट का विश्लेषण
भारत का डिफेंस सेक्टर बीते कुछ सालों में निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। ग्लोबल स्तर पर बढ़ते तनाव और भारत के स्वदेशी रक्षा निर्माण पर फोकस के चलते इस सेक्टर के स्टॉक्स में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। अब सवाल यह है कि क्या यह तेजी आगे भी जारी रहेगी या फिर इसमें गिरावट का दौर शुरू हो सकता है? इसी को लेकर प्रतिष्ठित ब्रोकरेज फर्म निर्मल बैंग ने एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की है, जिसमें डिफेंस सेक्टर की संभावनाओं, कंपनियों की ऑर्डर बुक और स्टॉक्स की चाल का गहन विश्लेषण किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का वार्षिक रक्षा उत्पादन 1.27 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है और वित्त वर्ष 2028-29 तक इसके 1.75 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। मौजूदा वित्त वर्ष में रक्षा मंत्रालय ने कुल 193 रक्षा सौदे किए हैं, जिनकी कुल वैल्यू 2.1 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। सबसे अहम बात यह है कि इनमें से 92% कॉन्ट्रैक्ट्स भारतीय कंपनियों को मिले हैं, जो ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की सफलता को दर्शाता है।
रक्षा निर्यात के मोर्चे पर भी भारत ने बड़ी छलांग लगाई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि देश के रक्षा निर्यात में 12% की वृद्धि हुई है और यह आंकड़ा 23,620 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। भारत की सरकारी और निजी कंपनियों ने मिलकर 80 से ज्यादा देशों को रक्षा उपकरण निर्यात किए हैं। FY29 तक सरकार ने 50,000 करोड़ रुपये के निर्यात लक्ष्य को निर्धारित किया है। पाकिस्तान के साथ सीमा पर तनाव के चलते हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे अभियानों ने ड्रोन और मिसाइल डिफेंस तकनीक की उपयोगिता को रेखांकित किया है। आने वाले समय में इस सेक्टर को 300 से 350 अरब रुपये के नए ऑर्डर मिलने की भी उम्मीद जताई गई है।
रक्षा मंत्रालय ने इस साल ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम, रडार, मिसाइल, बुलेटप्रूफ जैकेट्स, नाइट साइट्स, हेलमेट और अन्य रक्षा उपकरणों के लिए कुल 19,800 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट्स पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके अलावा QR-SAM, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, और मरीन माइन जैसी 10 बड़ी रक्षा परियोजनाओं को 1.1 लाख करोड़ रुपये की लागत के साथ मंजूरी दी गई है। यह सब दिखाता है कि सरकार रक्षा सेक्टर में निवेश को लेकर कितनी गंभीर है।
इस बीच, रूस निर्मित INS तमाल को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया है, जो तलवार-क्लास का आठवां युद्धपोत है। हालांकि, नौसेना अब विदेशी डिपेंडेंसी को कम करते हुए स्वदेशी डिजाइनों पर फोकस कर रही है। इसी दिशा में DRDO ने हाइपरसोनिक मिसाइल के लिए स्क्रैमजेट तकनीक की सफल टेस्टिंग भी पूरी कर ली है, जो आने वाले समय में भारत की सैन्य क्षमता को एक नई ऊंचाई दे सकता है।
अब अगर निवेश के नजरिए से बात करें तो निर्मल बैंग ने कई प्रमुख डिफेंस कंपनियों को लेकर निवेश सलाह भी दी है। उनके अनुसार, BUY रेटिंग जिन कंपनियों को मिली है उनमें शामिल हैं: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स (TP: ₹6,147), मझगांव डॉक (TP: ₹3,897), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (TP: ₹478), BEML (TP: ₹5,000), डेटा पैटर्न्स (TP: ₹3,401) और पारस डिफेंस (TP: ₹939)। वहीं, सोलर इंडस्ट्रीज (TP: ₹16,651), भारत डायनेमिक्स (TP: ₹1,788) और एस्ट्रा माइक्रोवेव (TP: ₹1,139) को ‘HOLD’ करने की सलाह दी गई है।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी माना गया है कि कुछ शेयरों में पिछले दिनों 10 से 15% तक की गिरावट दर्ज की गई है, और FY26 की पहली छमाही यानी H1FY26 में इनमें उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। खासतौर पर मझगांव डॉक का टारगेट प्राइस थोड़ा घटाया गया है, जबकि HAL का लक्ष्य बढ़ा दिया गया है।
कुल मिलाकर, मौजूदा डिफेंस ऑर्डर बुक, स्वदेशी रक्षा उपकरणों की बढ़ती मांग, सरकार की नीतिगत प्रतिबद्धता और तकनीकी नवाचार इस सेक्टर को मजबूत आधार दे रहे हैं। ऐसे में, दीर्घकालिक निवेशकों के लिए यह सेक्टर अब भी काफी संभावनाओं से भरा हुआ है। हां, शॉर्ट टर्म में कुछ कंपनियों में हल्की गिरावट या स्थिरता जरूर देखने को मिल सकती है, लेकिन लॉन्ग टर्म में रक्षा शेयरों का प्रदर्शन चमकदार रहने की उम्मीद की जा रही है।
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