May 2, 2026

लंदन प्रॉपर्टी घोटाले में रॉबर्ट वाड्रा से ED की पूछताछ तेज़, संजय भंडारी केस में नए खुलासे

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के पति और कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा एक बार फिर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की पूछताछ के घेरे में आ गए हैं। सोमवार, 14 जुलाई 2025 को वाड्रा को दिल्ली में ED दफ्तर में बुलाया गया, जहां उनसे कथित मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशी संपत्ति खरीद के मामले में करीब तीन घंटे तक पूछताछ की गई। यह जांच रक्षा डीलर संजय भंडारी से जुड़े एक बहुचर्चित केस का हिस्सा है, जो सालों से सुर्खियों में है।

ED को शक है कि 2008 में एक स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (SEZ) में बनने वाले पेट्रोकेमिकल प्रोजेक्ट के नाम पर करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई। इस प्रोजेक्ट में सरकारी कंपनी ने कॉन्ट्रैक्ट सैमसंग इंजीनियरिंग को दिया, जिसने आगे की डील दुबई की कंपनी सैंटेक इंटरनेशनल FZC को सौंपी—यह कंपनी संजय भंडारी की बताई जाती है।

जून 2009 में सैमसंग ने सैंटेक को करीब 49.9 लाख डॉलर का भुगतान किया। उसी समय भंडारी ने लंदन के पॉश इलाके ब्रायनस्टन स्क्वायर में एक आलीशान प्रॉपर्टी खरीद ली। यह संपत्ति Vortex Private Ltd. के नाम पर रजिस्टर्ड हुई, जिसके अकाउंट में सैंटेक ने 1.9 मिलियन पाउंड ट्रांसफर किए। बाद में Vortex के सभी शेयर स्काईलाइट इन्वेस्टमेंट्स FZE को ट्रांसफर किए गए, जो रॉबर्ट वाड्रा के करीबी सी. थंपी के नियंत्रण में बताई जाती है।

ईडी के पास मौजूद ईमेल्स और डिजिटल सबूतों से संकेत मिलता है कि रॉबर्ट वाड्रा न सिर्फ इस संपत्ति की जानकारी में थे, बल्कि इसके रिनोवेशन में भी उनकी दिलचस्पी थी। ईमेल्स में वाड्रा द्वारा भेजे गए अपडेट्स और मरम्मत के निर्देश शामिल हैं।

जांच एजेंसी का दावा है कि इस डील में राउंड ट्रिपिंग की गई—यानी नकली कॉन्ट्रैक्ट्स के ज़रिए रिश्वत को कंसल्टेंसी फीस दिखाकर विदेश भेजा गया, फिर उससे संपत्ति खरीदी गई और बाद में उसे बेचकर पैसा वैध रूप में वापस लाया गया।

इस मामले में संजय भंडारी पहले ही फरार हैं और भारत सरकार उन्हें यूके से प्रत्यर्पित करने की कोशिश कर रही है। वहीं, रॉबर्ट वाड्रा और उनके वकील इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते आए हैं। लेकिन ED की पूछताछ और दस्तावेज़ों की जांच से मामला अब और गंभीर होता नजर आ रहा है।

सूत्रों के मुताबिक रॉबर्ट वाड्रा को आने वाले दिनों में फिर से तलब किया जा सकता है। मामला केवल मनी लॉन्ड्रिंग तक सीमित नहीं रह गया, अब इसकी कड़ियाँ विदेशी कंपनियों, शेल फर्म्स और राजनीतिक प्रभाव तक जुड़ती जा रही हैं, जिससे यह केस और गहराता जा रहा है।

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