April 17, 2026

सोनिया गांधी की NEP 2020 पर तीखी आलोचना: ‘केंद्रीकरण, व्यवसायीकरण और सांप्रदायिकता का एजेंडा’

कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की आलोचना करते हुए इसे भारत के शिक्षा प्रणाली के लिए खतरनाक बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस नीति के माध्यम से केंद्र सरकार अपने तीन “C” एजेंडे – केंद्रीकरण, व्यवसायीकरण और सांप्रदायिकता को बढ़ावा दे रही है, जिससे भारत के युवाओं और बच्चों के भविष्य पर गहरा असर पड़ेगा। सोनिया गांधी ने यह बातें अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ में प्रकाशित अपने लेख में कही हैं।

सोनिया गांधी के आर्टिकल में शिक्षा नीति के बारे में पांच प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा की गई है:

1. मोदी सरकार शिक्षा के ढांचे को कमजोर कर रही है

सोनिया गांधी ने लिखा कि मोदी सरकार राज्य सरकारों को शिक्षा के महत्वपूर्ण निर्णयों से बाहर करके संघीय शिक्षा ढांचे को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय सरकार ने पूरी शिक्षा नीति को अपने नियंत्रण में ले लिया है, जिससे राज्य सरकारों को नीतिगत निर्णयों में कोई जगह नहीं मिल रही है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नीति में सांप्रदायिकता का तत्व भी बढ़ रहा है, जो बच्चों की शिक्षा के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।

 

2. सरकारी स्कूलों की जगह प्राइवेट स्कूलों को बढ़ावा

सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर सरकारी स्कूलों को कमजोर करने और प्राइवेट स्कूलों के अनियंत्रित व्यवसायीकरण को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने समग्र शिक्षा अभियान (SSA) के लिए ग्रांट को रोककर राज्य सरकारों को प्रधानमंत्री श्री योजना लागू करने के लिए मजबूर किया है। इस कदम से शिक्षा प्रणाली में और भी अधिक निजीकरण होगा, जो आम बच्चों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

 

3. आरटीई के तहत पड़ोस के स्कूलों का कमजोर होना

सोनिया गांधी ने RTE (शिक्षा का अधिकार) कानून का हवाला देते हुए कहा कि यह कानून सुनिश्चित करता है कि हर बच्चे को प्राथमिक और अपर प्राइमरी शिक्षा तक पहुंच मिले। इसके तहत, एक किलोमीटर के भीतर प्राइमरी स्कूल और तीन किलोमीटर के भीतर मिडिल स्कूल की व्यवस्था की जानी चाहिए थी, लेकिन NEP इस अवधारणा को कमजोर करता है। यह स्कूल परिसरों को बढ़ावा देकर बच्चों की शिक्षा की पहुंच को बाधित करता है, जो कि एक खतरनाक कदम है।

 

4. विश्वविद्यालयों को कर्ज लेने पर मजबूर किया जा रहा है

सोनिया ने इस बात पर चिंता जताई कि केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा में फाइनेंसिंग एजेंसी (HEFA) की शुरुआत की है, जिसके माध्यम से राज्य विश्वविद्यालयों को बाजार से उच्च ब्याज दरों पर कर्ज लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इससे विश्वविद्यालयों के छात्रों की फीस में वृद्धि हो रही है, क्योंकि विश्वविद्यालयों को कर्ज चुकाने के लिए छात्र से फीस बढ़ाकर रकम वसूल करनी पड़ती है।

 

5. शिक्षा प्रणाली के माध्यम से घृणा फैलाना

सोनिया गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार शिक्षा प्रणाली का इस्तेमाल नफरत फैलाने के लिए कर रही है। उन्होंने NCERT की किताबों में से मुगलों के इतिहास और महात्मा गांधी की हत्या से जुड़े महत्वपूर्ण अध्यायों को हटाने की कड़ी आलोचना की। इसके बाद, जनता के विरोध के बाद संविधान की प्रस्तावना को किताबों में वापस जोड़ा गया, लेकिन यह कदम शिक्षा के उद्देश्य को विकृत करने जैसा है।

सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार की इन नीतियों के जरिए भारतीय शिक्षा प्रणाली में केंद्रीयकरण, व्यवसायीकरण और सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने की गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि इन बदलावों से केवल समाज में भ्रम और असहमति पैदा होगी, और यह भारत के शिक्षा क्षेत्र की साख और गुणवत्ता को नष्ट कर देगा।

इस लेख में सोनिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि शिक्षा के मामले में सरकार का रवैया पूरी तरह से उदासीन है। उनका यह भी कहना था कि केंद्र सरकार की ये नीतियां शिक्षा के संघीय ढांचे को कमजोर कर रही हैं और इसके दूरगामी परिणाम समाज के लिए हानिकारक हो सकते हैं।

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