April 17, 2026

भारत के पूर्वोत्तरी राज्यों को लेकर मोहम्मद यूनुस के विवादित बयान पर मणिपुर के पूर्व सीएम एन बीरेन सिंह ने लगाई कड़ी फटकार!

भारत के पूर्वोत्तरी राज्यों को लेकर मोहम्मद यूनुस के विवादित बयान पर मणिपुर के पूर्व सीएम एन बीरेन सिंह ने लगाई कड़ी फटका

नई दिल्ली: बांग्लादेश की सियासत में उठते तूफान के बीच बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। यूनुस ने हाल ही में चीन के दौरे पर एक कार्यक्रम के दौरान भारत के पूर्वोत्तर के सात राज्यों को लेकर एक विवादित टिप्पणी की। उन्होंने इन राज्यों को “लैंडलॉक्ड” (जमीन से चारों ओर से घिरा हुआ) बताते हुए बांग्लादेश को हिंद महासागर का “संरक्षक” बताया और चीन से अपील की कि वह बांग्लादेश में अपनी आर्थिक गतिविधियां बढ़ाए। इस बयान पर भारत में राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस बयान की कड़ी आलोचना की है।

बीरेन सिंह का जोरदार जवाब: “यह बयान भड़काऊ और अनुचित”

मणिपुर के पूर्व सीएम एन बीरेन सिंह ने यूनुस के बयान पर कड़ा जवाब देते हुए कहा कि यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि यूनुस और उनकी सरकार अपने भू-राजनीतिक एजेंडे को पूरा करने के लिए पूर्वोत्तर भारत को एक मोहरे के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। सिंह ने कहा कि इस प्रकार के भड़काऊ बयान अनुचित हैं और वे इसकी कड़ी निंदा करते हैं। उन्होंने यूनुस को चेतावनी दी कि वे भारत के बारे में बेबुनियाद टिप्पणियाँ न करें, क्योंकि ऐसी बातें “मूर्खतापूर्ण” हैं और इसका नकारात्मक परिणाम हो सकता है।

सिंह ने आगे कहा, “भारत की एकता और अखंडता पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता, और इसे चुनौती नहीं दी जा सकती।” उन्होंने मोहम्मद यूनुस से संयम बरतने की अपील की और कहा कि इस प्रकार के बयान भारत की क्षेत्रीय अखंडता को खतरे में डाल सकते हैं।

सीएम सरमा ने भी उठाया सवाल: “यूनुस के बयान में छिपा बड़ा रणनीतिक इरादा”

इससे पहले, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी यूनुस के बयान पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने इसे “निंदनीय” और “अपमानजनक” करार दिया। सरमा ने कहा कि यूनुस के बयान में एक गहरी रणनीतिक सोच छिपी हुई है, जो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा और एकता को चुनौती देती है।

उन्होंने इस बयान को “चिकन नेक गलियारे” की स्थिति से जोड़ते हुए कहा, “यह बयान भारत के रणनीतिक ‘चिकन नेक’ गलियारे की हलचल को दर्शाता है, जो पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।” सरमा ने यह भी कहा कि भारत को इस क्षेत्र में और अधिक मजबूत रेल और सड़क नेटवर्क विकसित करने की आवश्यकता है ताकि किसी भी खतरे का मुकाबला किया जा सके।

 

क्या था यूनुस का बयान?

बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने बीजिंग के एक होटल में आयोजित उच्च स्तरीय राउंडटेबल मंथन के दौरान कहा था, “भारत के सात राज्य, जिन्हें ‘सेवन सिस्टर्स’ के नाम से जाना जाता है, भूमि से घिरे हुए हैं और उनके पास समुद्र तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है। हम इस क्षेत्र में समुद्र के एकमात्र संरक्षक हैं। इस कारण इस क्षेत्र में संभावनाओं के असीमित दरवाजे खुलते हैं।”

यूनुस का यह बयान विशेष रूप से भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के लिए संवेदनशील था, जहां पहले ही चीन के बढ़ते प्रभाव और बांग्लादेश के साथ क्षेत्रीय रिश्तों पर ध्यान दिया जा रहा है। यूनुस ने चीन से यह अपील की कि वह बांग्लादेश में अपनी आर्थिक गतिविधियां बढ़ाए और इससे दोनों देशों के लिए एक नई आर्थिक स्थिति उत्पन्न हो।

क्या है “चिकन नेक” और पूर्वोत्तर भारत का महत्व?

“चिकन नेक” भारत का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक मार्ग है, जो पूर्वोत्तर राज्यों को भारत के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। यह इलाका पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन के बीच एक संवेदनशील क्षेत्र है, जहां कई बार अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा के मुद्दे उभरते रहे हैं। भारतीय नीति-makers के लिए यह क्षेत्र हमेशा से ही एक चिंता का विषय रहा है, और सरमा ने इसे अपने बयान में सही समय पर उठाया!

क्या है यूनुस का असली उद्देश्य?

यूनुस के बयान ने न केवल बांग्लादेश और भारत के बीच तनाव को बढ़ाया है, बल्कि यह पूरे दक्षिण एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठाता है। क्या यूनुस की यह टिप्पणी केवल एक व्यक्तिगत विचार है, या फिर इसे एक बड़ा रणनीतिक कदम माना जाए? क्या यह बयान चीन-बांग्लादेश संबंधों को और मजबूत करने का हिस्सा है? यह सवाल भविष्य में और भी उभर सकते हैं, और भारत को अपनी

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