प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 और 11 जनवरी को गुजरात के सोमनाथ दौरे पर रहेंगे, जहां वे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में हिस्सा लेंगे। इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक आयोजन के तहत 10 जनवरी की शाम करीब 8 बजे प्रधानमंत्री मोदी सोमनाथ मंदिर परिसर में ओंकार मंत्र का जाप करेंगे और इसके बाद भव्य ड्रोन शो का अवलोकन करेंगे। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 8 से 11 जनवरी 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देशभर से संत-महात्मा और श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। यह पर्व उन असंख्य नागरिकों की स्मृति को समर्पित है, जिन्होंने सोमनाथ मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी और आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक चेतना का मार्ग प्रशस्त किया।
सोमनाथ मंदिर में ओंकार मंत्र का जप केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं है, बल्कि यह भारतीय सनातन परंपरा में ध्यान, साधना और आत्मिक संतुलन का प्रतीक माना जाता है। हिंदू दर्शन में ओंकार यानी ‘ॐ’ को ब्रह्मांड की मूल ध्वनि कहा गया है। वेदों, उपनिषदों और योग शास्त्रों में इसे ईश्वर का स्वरूप बताया गया है। मान्यता है कि सृष्टि की उत्पत्ति इसी ध्वनि से हुई थी। ऐसे में देश के प्रधानमंत्री द्वारा सोमनाथ जैसे पवित्र ज्योतिर्लिंग स्थल पर ओंकार मंत्र का जाप करना आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है।
धार्मिक और योग परंपराओं के अनुसार, ओंकार मंत्र एकाक्षरी मंत्र है, जो ‘अ’, ‘उ’ और ‘म’ तीन ध्वनियों से मिलकर बना है। ये ध्वनियां जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्त अवस्थाओं का प्रतीक मानी जाती हैं। माना जाता है कि इसके नियमित जप से मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित होता है। शास्त्रों में वर्णित है कि ओंकार जप से नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होता है, मानसिक शांति मिलती है और आत्मविश्वास बढ़ता है। विद्यार्थियों के लिए इसे एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ाने वाला मंत्र माना गया है, जबकि आध्यात्मिक साधकों के लिए यह मोक्ष की दिशा में मार्गदर्शक बताया गया है।
ओंकार मंत्र का जप शिवालय या घर पर भी किया जा सकता है। इसके लिए शांत स्थान पर सुखासन या पद्मासन में बैठकर, रीढ़ को सीधा रखते हुए आंखें बंद कर गहरी सांस ली जाती है और छोड़ते समय लंबी आवाज में ‘ॐ’ का उच्चारण किया जाता है। ध्यान इस बात पर केंद्रित किया जाता है कि ध्वनि नाभि से उठकर हृदय और मस्तिष्क तक पहुंचे। रुद्राक्ष की माला से ‘ॐ’ या ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जप भी प्रचलित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे ग्रह-नक्षत्रों के अशुभ प्रभाव में कमी आती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का ऐतिहासिक महत्व भी बेहद गहरा है। यह आयोजन 1026 ईस्वी में महमूद गजनवी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर किए गए आक्रमण की 1000वीं वर्षगांठ के अवसर पर किया जा रहा है। सदियों तक कई बार नष्ट किए जाने के बावजूद सोमनाथ मंदिर आज भी आस्था, स्वाभिमान और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बना हुआ है। स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों से मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ और 1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में इसे भक्तों के लिए खोला गया। वर्ष 2026 में इस ऐतिहासिक जीर्णोद्धार के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं, जिससे इस पर्व का महत्व और भी बढ़ गया है।
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