पुरी रथ यात्रा में VIP व्यवस्था ने छीनी 3 ज़िंदगियां? गुंडिचा मंदिर भगदड़ पर उठे सवाल, परिजन बोले- पुलिस की लापरवाही से गई जान
पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा इस बार श्रद्धा की बजाय मातम का दृश्य बन गई। रविवार सुबह गुंडिचा मंदिर के पास मची भगदड़ में तीन लोगों की मौत हो गई और छह घायल हो गए। हादसे ने न सिर्फ प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि VIP व्यवस्थाओं की प्राथमिकता को लेकर भी तीखी आलोचना हो रही है।
हादसा सुबह 4 से 5 बजे के बीच हुआ जब मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा थी। इसी दौरान भीड़ बेकाबू हो गई और निकास के सुचारू इंतज़ाम न होने के कारण भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। मृतकों की पहचान प्रेमकांत मोहंती (80), बसंती साहू (36) और प्रभाती दास (42) के रूप में हुई है।
प्रशासन की लापरवाही का आरोप
प्रत्यक्षदर्शियों और मृतकों के परिजनों का साफ आरोप है कि पुलिस और प्रशासन की लापरवाही इस हादसे की बड़ी वजह बनी। पुरी निवासी स्वाधीन कुमार पंडा ने बताया कि मंदिर परिसर में दो प्रवेश द्वार थे—एक से लोगों को अंदर जाने दिया जा रहा था, लेकिन निकास के लिए तय गेट को दूर बता दिया गया। इस बीच प्रशासन ने VIP के लिए नया रास्ता बना दिया, जिससे आम श्रद्धालुओं में भ्रम और अफरातफरी फैल गई। नतीजा यह हुआ कि लोग प्रवेश द्वार से ही बाहर निकलने लगे और भीड़ एकत्र होकर दबाव में आ गई।
भीड़ प्रबंधन पूरी तरह फेल
गवाहों ने यह भी बताया कि यातायात व्यवस्था और आपात स्थिति से निपटने के कोई इंतज़ाम नहीं थे। मंदिर के पास अनियंत्रित गाड़ियों की भीड़ जमा हो गई, जिससे भागने का रास्ता और सीमित हो गया।
मृतक के पति का छलका दर्द
एक मृतक महिला के पति ने भावुक होकर कहा कि हादसे के बाद न तो पुलिस पहुंची, न फायर ब्रिगेड और न ही कोई मेडिकल टीम। उन्होंने कहा, “यह एक ऐसी दयनीय स्थिति थी जिसे बयान नहीं किया जा सकता।” उन्होंने इसे पूरी तरह प्रशासनिक विफलता बताया।
सरकार ने जताई संवेदना, जांच के आदेश
घटना के बाद ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने गहरी संवेदना जताई है। उन्होंने कहा कि उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं और जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अब सवाल उठता है कि क्या धार्मिक आयोजनों में VIP व्यवस्थाएं आम श्रद्धालुओं की सुरक्षा से बड़ी हो गई हैं? क्या प्रशासन ने समय रहते हालात को संभालने की कोशिश की? यह हादसा एक चेतावनी है कि श्रद्धा की भीड़ को लापरवाही की भेंट चढ़ाना अब और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
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