भारत में सोना हमेशा से न सिर्फ आभूषण बल्कि सुरक्षा और निवेश का भी प्रतीक रहा है। बदलते दौर में लोग अब तिजोरी में सोना रखने के बजाय डिजिटल सोना यानी Gold ETF और Gold Mutual Fund को प्राथमिकता देने लगे हैं। दोनों ही विकल्प सोने की कीमतों से जुड़े हैं, लेकिन निवेश की प्रक्रिया, लागत और रिटर्न के मामले में इनमें फर्क है।
Gold ETF (Exchange Traded Fund) दरअसल एक ऐसा निवेश साधन है जो सोने की कीमतों के उतार-चढ़ाव को ट्रैक करता है। हर एक यूनिट लगभग 1 ग्राम शुद्ध (99.5%) सोने के बराबर होती है। इसे स्टॉक एक्सचेंज पर शेयरों की तरह खरीदा-बेचा जा सकता है, इसलिए इसमें निवेश के लिए डीमैट अकाउंट जरूरी होता है। इसका सबसे बड़ा फायदा है — इसमें भौतिक सोना रखने की जरूरत नहीं होती, जिससे चोरी या अशुद्धता की चिंता खत्म हो जाती है।
गोल्ड म्यूचुअल फंड उन निवेशकों के लिए बेहतर विकल्प है, जिनके पास डीमैट अकाउंट नहीं है या जो शेयर बाजार में ट्रेडिंग से बचना चाहते हैं। ये फंड Gold ETFs या सीधे सोने में निवेश करते हैं। निवेशक इसमें SIP (Systematic Investment Plan) के जरिए छोटी रकम से शुरुआत कर सकते हैं। शुरुआती निवेशकों के लिए यह विकल्प सरल और लचीला माना जाता है।
गोल्ड ईटीएफ की लागत आमतौर पर 0.4% से 0.7% तक होती है, जबकि गोल्ड म्यूचुअल फंड का खर्च अनुपात 0.8% से 1.5% तक रहता है। यानी म्यूचुअल फंड थोड़ा महंगा पड़ता है। हालांकि पिछले 10 वर्षों में दोनों विकल्पों ने लगभग 13-14% का औसत वार्षिक रिटर्न दिया है। कम व्यय अनुपात के कारण Gold ETF में शुद्ध रिटर्न थोड़ा ज्यादा निकलता है।
अगर आपके पास डीमैट अकाउंट है और आप शेयर बाजार में सहज हैं, तो Gold ETF ज्यादा उपयुक्त है — इसमें कम खर्च, बेहतर पारदर्शिता और त्वरित खरीद-बिक्री का फायदा है। वहीं अगर आप नए निवेशक हैं या हर महीने छोटी राशि से निवेश शुरू करना चाहते हैं, तो Gold Mutual Fund एक सुविधाजनक और आसान विकल्प साबित होगा।
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