भारत के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने एक बड़ा लक्ष्य तय किया है। बैंक ने 100 लाख करोड़ रुपये के कारोबार का आंकड़ा पार करने के बाद अब 2030 तक खुद को दुनिया के शीर्ष 10 सबसे मूल्यवान बैंकों की सूची में शामिल करने का प्लान बनाया है। यह कदम न केवल भारत के बैंकिंग सेक्टर की तेजी से बढ़ती ताकत को दिखाता है, बल्कि वैश्विक बैंकिंग बाजार में भारत की स्थिति को भी मजबूत करेगा।
एसबीआई के चेयरमैन सी.एस. सेट्टी ने कहा कि बैंक अब अपने मार्केट वैल्यू को और बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि फिलहाल बैंक का कैपिटल पर्याप्तता अनुपात (CAR) 14.62% और कोर इक्विटी अनुपात (CET-1) 11.47% है, जिसे 15% और 12% तक बढ़ाने का लक्ष्य है। सेट्टी के मुताबिक, “पिछले कुछ सालों में प्रॉफिट में अच्छी बढ़त हुई है और हमारा फोकस अब बैंक की ग्रोथ को स्थायी और मजबूत बनाने पर है।”
उन्होंने आगे बताया कि पूंजी बढ़ाने का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बैंक के पास पर्याप्त सुरक्षा बफर (capital buffer) मौजूद रहे। एसबीआई ने 100 लाख करोड़ रुपये के कारोबार का यह स्तर अपने कुल लोन और जमा दोनों को मिलाकर हासिल किया है। वर्तमान में शाखाओं की संख्या और लोन वॉल्यूम के हिसाब से एसबीआई देश का सबसे बड़ा बैंक है।
गुरुवार को बैंक का मार्केट कैपिटलाइजेशन 100 अरब डॉलर के पार चला गया, जिससे वह भारत की सबसे बड़ी कंपनियों — एचडीएफसी बैंक, टीसीएस, रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारती एयरटेल और आईसीआईसीआई बैंक — की लीग में शामिल हो गया। सितंबर 2025 तिमाही में बैंक ने 10% की सालाना वृद्धि के साथ 20,160 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो रिटेल, एग्रीकल्चर और एमएसएमई लोन बढ़ने तथा यस बैंक में हिस्सेदारी बेचने से संभव हुआ।
एसबीआई की यह नई रणनीति भारतीय बैंकिंग सेक्टर की मजबूती और आत्मनिर्भरता का संकेत है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बैंक इसी रफ्तार से आगे बढ़ता रहा, तो 2030 तक भारत का नाम ग्लोबल बैंकिंग की शीर्ष सूची में दर्ज होना तय है।
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