April 17, 2026

सावन सोमवार 2025: कब है पहला व्रत? जानें तिथि, मुहूर्त और पूजा का महत्व

भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए श्रावण मास (सावन) का विशेष महत्व माना जाता है। यह पूरा महीना शिवभक्ति को समर्पित होता है और मान्यता है कि इस दौरान स्वयं भोलेनाथ धरती पर निवास करते हैं। इसलिए इस महीने में की गई पूजा, व्रत और भक्ति विशेष फलदायी मानी जाती है।

क्यों खास होते हैं सावन के सोमवार?

सावन का हर दिन तो पवित्र होता ही है, लेकिन सोमवार का विशेष महत्त्व होता है, क्योंकि यह दिन शिवजी को समर्पित है। सावन के सोमवार को “सावन सोमवारी व्रत” के रूप में मनाया जाता है, जिसमें भक्त उपवास रखकर शिवजी की विशेष पूजा करते हैं। विशेष रूप से पहले और अंतिम सावन सोमवार को अत्यधिक शुभ माना जाता है। यह भी मान्यता है कि अगर कोई व्यक्ति पूरे सावन में सभी सोमवार का व्रत नहीं रख सकता तो केवल पहला और अंतिम सोमवार का व्रत ही करने से पुण्य लाभ मिल सकता है।

सावन 2025 की शुरुआत और व्रत तिथियां

इस वर्ष श्रावण मास की शुरुआत 11 जुलाई 2025 से हो रही है और समाप्ति 9 अगस्त 2025 को होगी। इस बार सावन में चार सोमवार पड़ेंगे:

पहला सोमवार व्रत: 14 जुलाई 2025

दूसरा सोमवार व्रत: 21 जुलाई 2025

तीसरा सोमवार व्रत: 28 जुलाई 2025

चौथा सोमवार व्रत: 4 अगस्त 2025

सावन के पहले सोमवार (14 जुलाई) के शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:16 बजे से 5:04 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:05 बजे से 12:58 बजे तक

अमृत काल: दोपहर 12:01 बजे से 1:39 बजे तक

प्रदोष काल: शाम 5:38 बजे से 7:22 बजे तक

पूजा का श्रेष्ठ समय: सुबह 11:38 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक

इस दिन त्रिपुष्कर योग भी बन रहा है, जो किसी भी शुभ कार्य की सिद्धि के लिए विशेष रूप से फलदायक माना जाता है। साथ ही, भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में भी अत्यंत शुभ मानी जाती है।

सावन में शिवभक्ति का फल

इस पवित्र मास में शिवजी की उपासना, विशेषकर रुद्राभिषेक, बिल्वपत्र अर्पण, शिवलिंग पर जल व दूध चढ़ाना, और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि सावन सोमवार का व्रत करने से विवाह, संतान, और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का निवारण होता है।

नोट: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग आधारित ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। किसी भी निर्णय या उपाय को अपनाने से पहले योग्य ज्योतिष या विद्वान की सलाह अवश्य लें।

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