सऊदी से लौटे यात्रियों का हाईवे पर अपहरण और फार्महाउस में बंधक ड्रामा से लौटे यात्रियों का हाईवे पर अपहरण और फार्महाउस में बंधक ड्रामा
“सोना बाहर निकालो नहीं तो पेट चीर देंगे…”—ये शब्द किसी फिल्मी सीन के नहीं, बल्कि हकीकत में दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर उस वक्त सुनाई दिए जब सऊदी अरब से लौट रहे छह लोगों का अपहरण कर लिया गया। पूरी वारदात एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा थी, जिसमें अपहरणकर्ताओं को पहले से जानकारी थी कि इन यात्रियों ने अपने पेट में सोना छिपा रखा है।
कब और कहाँ शुरू हुआ ये सस्पेंस?
यह सनसनीखेज घटना शुक्रवार दोपहर मुरादाबाद ज़िले के पास पुराना टोला टैक्स के नज़दीक हुई। रामपुर के टांडा क्षेत्र के निवासी छह लोग एक कार में सवार होकर दिल्ली से अपने घर लौट रहे थे। तभी दो कारों में सवार बदमाशों ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर उनकी गाड़ी को रुकवाया और हथियारों के बल पर उन्हें अगवा कर लिया।
फॉर्महाउस बना टॉर्चर चेंबर
उन्हें मुरादाबाद के मूंढापांडे इलाके के रौंडा गांव स्थित एक फार्म हाउस में ले जाया गया, जहां उन्हें कैद कर लिया गया। बदमाशों को पक्की जानकारी थी कि ये लोग पेट में सोना छिपाकर ला रहे हैं। फार्महाउस में उन्होंने सभी को पहले खाना और दवाइयां दीं ताकि पेट से सोना बाहर निकल आए। जब ऐसा नहीं हुआ, तो उन्होंने धमकी दी—”अगर सोना नहीं निकाला, तो पेट चीर देंगे।” इस धमकी ने सभी बंधकों के होश उड़ा दिए।
नाटकीय मोड़: ज़ुल्फेकार की बहादुरी से पलटा खेल
बंधकों में से एक, ज़ुल्फेकार, ने मौका देखकर छलांग लगा दी और फार्महाउस की दीवार कूदकर पास के गांव में पहुंच गया। वहाँ उसने ग्रामीणों को पूरी घटना की जानकारी दी।
पुलिस एक्शन में आई, मुठभेड़ और गिरफ्तारी
सूचना मिलते ही एसओजी टीम, मूंढापांडे और कटघर थाना पुलिस ने फार्म हाउस की घेराबंदी की। मुठभेड़ के दौरान दो बदमाशों को गोली मारकर गिरफ़्तार किया गया और सभी बंधकों को सुरक्षित छुड़ा लिया गया।
अंदर की बात: मुखबिरी किसी ‘अपने’ की?
पुलिस को शक है कि अपहरणकर्ताओं को इन लोगों की गतिविधियों की पल-पल की जानकारी थी—कब दिल्ली से निकले, कब टोल पर पहुँचेंगे। इससे अंदेशा जताया जा रहा है कि इसमें किसी नज़दीकी व्यक्ति की मिलीभगत हो सकती है, जिसने बदमाशों को पूरी सूचना दी।
फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सोना पेट में छिपाकर लाने की यह जानकारी अपहरणकर्ताओं तक कैसे पहुँची।
यह घटना न सिर्फ प्रवासी कामगारों की सुरक्षा पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि किस तरह तस्करी और लालच का खेल अब आम यात्रियों की जान पर बन आया है।
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