May 1, 2026

सैफ अली खान की 15,000 करोड़ की संपत्ति पर मंडराया कानूनी खतरा, जानिए क्या है ‘शत्रु संपत्ति’ विवाद

सैफ अली खान की भोपाल स्थित करीब 15,000 करोड़ रुपये की फैमिली प्रॉपर्टी इस समय एक गंभीर कानूनी विवाद में उलझ गई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 30 जून 2025 को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के पुराने आदेश को पलट दिया, जिसमें सैफ, उनकी मां शर्मिला टैगोर और बहनों को संपत्ति का असली मालिक माना गया था। कोर्ट के इस फैसले से अब मामला फिर से खुल गया है और सैफ की इस विरासत पर संकट गहरा गया है।

यह विवाद वर्ष 2000 में शुरू हुआ था, जब एक निचली अदालत ने नवाब हमीदुल्लाह खान की संपत्ति का हकदार सैफ का परिवार बताया था। लेकिन नवाब के कुछ अन्य उत्तराधिकारियों ने इस फैसले को चुनौती दी और कहा कि संपत्ति का बंटवारा मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार होना चाहिए, न कि शाही परंपराओं के मुताबिक।

इसके साथ ही, एक और बड़ा सवाल यह भी है कि क्या ये संपत्तियां ‘शत्रु संपत्ति’ (Enemy Property) के दायरे में आती हैं या नहीं। साल 2014 में ‘कस्टोडियन ऑफ एनिमी प्रॉपर्टी’ ने एक अधिसूचना जारी कर इस विरासत को Enemy Property Act, 1968 के अंतर्गत लाने का आदेश दिया था। वजह यह दी गई कि नवाब की बड़ी बेटी अबीदा सुल्तान ने बंटवारे के बाद पाकिस्तान की नागरिकता ले ली थी, और ऐसे में उनके हिस्से की संपत्ति शत्रु संपत्ति घोषित होनी चाहिए।

सैफ ने इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी थी और 2015 में स्टे भी मिल गया था। लेकिन 13 दिसंबर 2024 को हाईकोर्ट ने यह स्टे हटा दिया और उनकी याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने अपील के लिए 30 दिन का समय दिया था, जो अब समाप्त हो चुका है। ऐसे में भोपाल जिला प्रशासन जल्द ही इन संपत्तियों को सरकार की ओर से जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।

किन संपत्तियों पर है विवाद?
इस कानूनी विवाद में भोपाल और आसपास की कई ऐतिहासिक और बेशकीमती संपत्तियां शामिल हैं, जिनमें शामिल हैं:

नूर-उस-सबाह पैलेस: जो अब एक लग्जरी होटल है।

फ्लैग स्टाफ हाउस: सैफ का बचपन इसी घर में बीता।

दर-उस-सलाम, हबीबी का बंगला, अहमदाबाद पैलेस और कोहे-फिजा की प्रॉपर्टीज।

इनकी कुल अनुमानित कीमत लगभग 15,000 करोड़ रुपये है, जो इसे देश के सबसे बड़े संपत्ति विवादों में से एक बनाता है।

क्या है Enemy Property Act?
‘शत्रु संपत्ति’ उस संपत्ति को कहा जाता है जो भारत में मौजूद हो लेकिन उसका मालिक पाकिस्तान, चीन या किसी दुश्मन देश का नागरिक हो, या वह वहां की नागरिकता ले चुका हो। 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद भारत सरकार ने 1968 में Enemy Property Act लागू किया, ताकि दुश्मन देशों के नागरिकों की संपत्ति पर भारतीय नागरिक दावा न कर सकें।

2017 में इस कानून को संशोधित कर और कठोर बना दिया गया। संशोधन के मुताबिक, अगर संपत्ति दुश्मन नागरिक के नाम दर्ज है तो उसके भारतीय वारिस भी उस पर दावा नहीं कर सकते, भले ही वे भारत के नागरिक क्यों न हों। यह संशोधन पुराने मामलों पर भी लागू होता है, जिससे कई पुराने दावे भी रद्द हो गए हैं।

सैफ का इस विरासत से क्या संबंध है?
सैफ अली खान को ये संपत्तियां उनकी दादी साजिदा सुल्तान के जरिए मिली थीं, जो नवाब हमीदुल्लाह खान की बेटी थीं। जब अबीदा सुल्तान ने पाकिस्तान की नागरिकता ले ली थी, तब भारत सरकार ने साजिदा को भोपाल की नवाब बेगम और संपत्तियों की उत्तराधिकारी घोषित किया था। बाद में ये संपत्तियां सैफ के पिता मंसूर अली खान पटौदी को मिलीं और फिर सैफ के परिवार को इनका मालिक माना गया।

अब कानूनी पेचिदगियों और Enemy Property के प्रावधानों के चलते यह विरासत सैफ के हाथ से फिसल भी सकती है, अगर अदालत ने अंतिम फैसला उनके खिलाफ दिया। यह मामला अब भारत की कानूनी और राजनीतिक प्रणाली के लिए भी एक अहम मिसाल बन सकता है।

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