क्या भारत की आर्थिक नीतियों में होगा बड़ा बदलाव? इंद्रनील भट्टाचार्य बने RBI के नए कार्यकारी निदेशक
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गुरुवार को इंद्रनील भट्टाचार्य को कार्यकारी निदेशक (ED) नियुक्त किया है। क्या इस नई नियुक्ति से देश की मौद्रिक और राजकोषीय नीति में कोई बड़ा बदलाव होगा? आरबीआई ने अपने बयान में कहा कि भट्टाचार्य आर्थिक और नीति अनुसंधान विभाग का कार्यभार संभालेंगे। यह नियुक्ति 19 मार्च से प्रभावी होगी। इससे पहले, वे आरबीआई के मौद्रिक नीति विभाग में सलाहकार के रूप में कार्यरत थे।
कौन हैं इंद्रनील भट्टाचार्य?
इंद्रनील भट्टाचार्य का बैंकिंग और मौद्रिक नीति में 30 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने मौद्रिक नीति विभाग, आर्थिक और नीति अनुसंधान विभाग और अंतरराष्ट्रीय विभाग में विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है। इसके अलावा, उन्होंने 2009-2014 के बीच कतर सेंट्रल बैंक, दोहा में गवर्नर के तकनीकी कार्यालय में आर्थिक विशेषज्ञ के रूप में भी अपनी सेवाएं दी थीं। भट्टाचार्य ने नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की है। आरबीआई के मुताबिक, उनकी शोध रुचि मौद्रिक सिद्धांत और नीति, वित्तीय बाजार, बाजार सूक्ष्म संरचना और राजकोषीय नीति से संबंधित है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी नियुक्ति के बाद आरबीआई की आर्थिक और मौद्रिक नीतियों में कोई महत्वपूर्ण बदलाव आता है या नहीं।
ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर? बैंक ऑफ इंग्लैंड ने ब्याज दरों पर लिया बड़ा फैसला!
लंदन से एक और बड़ी खबर सामने आई है। बैंक ऑफ इंग्लैंड (BOE) ने गुरुवार को घोषणा की कि वह ब्रिटेन की ब्याज दरों को फिलहाल अपरिवर्तित रखेगा। इस फैसले के पीछे मुख्य कारण देश में बढ़ती मुद्रास्फीति और आने वाले महीनों में संभावित महंगाई का दबाव बताया जा रहा है।
क्या है ब्रिटेन की ब्याज दरों की मौजूदा स्थिति?
बैंक ऑफ इंग्लैंड की नौ सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने फैसला किया कि मुख्य ब्याज दर 4.50% पर ही बनी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटेन में न्यूनतम वेतन में वृद्धि और बढ़ते वेतनकर के कारण कंपनियां कीमतें और बढ़ा सकती हैं, जिससे महंगाई और ज्यादा बढ़ सकती है। जनवरी 2025 में ब्रिटेन में मुद्रास्फीति 3% के स्तर पर पहुंच गई थी, जो बैंक ऑफ इंग्लैंड के 2% के लक्ष्य से अधिक है। कुछ अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में मुद्रास्फीति 4% तक पहुंच सकती है।
क्या ब्याज दरों में कोई बदलाव हो सकता है?
MPC ने पिछले साल अगस्त से अब तक तीन बार ब्याज दरों में कटौती की है। फरवरी 2025 में भी एक बार दरों में कटौती की गई थी, जब ब्रिटेन में महंगाई 10% से घटकर सिंगल डिजिट में आई थी। हालांकि, वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए अगले कुछ महीनों में ब्याज दरों में और कटौती की संभावना कम मानी जा रही है। अब सवाल यह है कि ब्रिटेन की सरकार और बैंक ऑफ इंग्लैंड आने वाले महीनों में मुद्रास्फीति को काबू में रखने के लिए क्या कदम उठाएंगे?
भारत और ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में क्या बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा?
✔️ भारत: इंद्रनील भट्टाचार्य की नियुक्ति के बाद आरबीआई की नीतियों में नया दृष्टिकोण देखने को मिल सकता है। विशेष रूप से मौद्रिक नीति और बैंकिंग नियमन के क्षेत्रों में बदलाव संभव हैं।
✔️ ब्रिटेन: महंगाई नियंत्रण में लाने के लिए ब्याज दरों को फिलहाल स्थिर रखा गया है, लेकिन आने वाले महीनों में अगर महंगाई और बढ़ती है, तो ब्याज दरों में दोबारा बढ़ोतरी हो सकती है।
अब देखने वाली बात होगी कि ये दोनों बड़े फैसले वैश्विक बाजारों और निवेशकों पर क्या असर डालते हैं।
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