क्या भारत बच पाएगा वैश्विक मंदी से? फिच की रिपोर्ट ने किया बड़ा दावा!
अमेरिका की टैरिफ नीतियों और वैश्विक व्यापार युद्ध के कारण कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं मंदी के जोखिम में हैं। लेकिन एक हालिया रिपोर्ट ने दावा किया है कि भारत इस संकट से अछूता रहेगा और उसकी अर्थव्यवस्था अगले वित्त वर्ष में 6.5% की दर से बढ़ेगी।
फिच रेटिंग्स (Fitch Ratings) द्वारा जारी ग्लोबल इकनॉमिक आउटलुक (GEO) की मार्च रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की आक्रामक व्यापार नीतियां वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बन रही हैं। हालांकि, भारत की बाहरी मांग पर कम निर्भरता और बढ़ती आत्मनिर्भरता के चलते इस व्यापार युद्ध का गहरा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर नहीं पड़ेगा।
2025-26 में 6.5% की दर से बढ़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2025-26 में 6.5% रहने का अनुमान है, जबकि 2026-27 में यह मामूली घटकर 6.3% हो सकती है।
इसके पीछे कई कारक जिम्मेदार हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
✔️ निर्यात में मजबूती और आयात में गिरावट
✔️ कर स्लैब में संशोधन और बढ़ी करमुक्त आय
✔️ केंद्रीय बजट में पूंजीगत खर्च का बढ़ा हुआ आवंटन
✔️ आरबीआई की संभावित ब्याज दरों में कटौती
फिच की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और पूंजीगत खर्च में वृद्धि के चलते इसमें और तेजी आएगी।
निर्यात से मिलेगी मजबूती, कृषि क्षेत्र का भी योगदान
भारत की निर्यात नीति में मजबूती के कारण वैश्विक मंदी के बावजूद अर्थव्यवस्था को समर्थन मिलने की संभावना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्यात में तेजी और आयात में गिरावट का संयोजन भारतीय जीडीपी को स्थिरता प्रदान करेगा।
इसके अलावा, मजबूत कृषि उत्पादन भी आर्थिक वृद्धि को समर्थन दे रहा है।
✔️ 2024-25 की तीसरी तिमाही में वृद्धि दर 5.4% थी, जो चौथी तिमाही में बढ़कर 6.2% हो गई।
✔️ अच्छे मानसून और खरीफ फसल के बढ़े उत्पादन ने इस बढ़ोतरी में अहम भूमिका निभाई।
ब्याज दरों में कटौती से निवेश को बढ़ावा मिलेगा
फिच रेटिंग्स ने अनुमान लगाया है कि इस साल आरबीआई (RBI) दो बार और रेपो दर में कटौती कर सकता है।
✔️ वर्तमान में रेपो दर 6.25% है, जो दिसंबर 2025 तक घटकर 5.75% हो सकती है।
✔️ इससे उधारी की लागत कम होगी, जिससे निजी निवेश और पूंजीगत खर्च में बढ़ोतरी होगी।
महंगाई पर भी रिपोर्ट में अहम जानकारी दी गई है।
✔️ फरवरी 2025 में खुदरा महंगाई घटकर 4% से नीचे आ गई थी।
✔️ हालांकि, दिसंबर 2026 तक इसमें मामूली वृद्धि होकर 4.3% तक पहुंच सकती है।
बढ़ा कारोबारी भरोसा, निजी क्षेत्र में भी तेजी की उम्मीद
✔️ भारत में कारोबारी विश्वास (Business Confidence) ऊंचे स्तर पर बना हुआ है।
✔️ बैंकिंग सेक्टर में निजी क्षेत्र को दिए जाने वाले कर्ज में भी दहाई अंकों की वृद्धि जारी है।
केंद्रीय बजट में सार्वजनिक पूंजीगत खर्च के उच्च आवंटन से भारतीय अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त मजबूती मिलेगी। इसके चलते औद्योगिक उत्पादन और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में तेजी की उम्मीद जताई गई है।
क्या भारत दुनिया की मंदी से बच पाएगा?
✔️ अमेरिकी व्यापार नीतियां और वैश्विक मंदी के संकेत भले ही कई देशों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं, लेकिन भारत इस चुनौती से उभरने में सक्षम दिख रहा है।
✔️ आत्मनिर्भरता, पूंजीगत खर्च, बढ़ता निर्यात और मजबूत कृषि उत्पादन जैसे कारक भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में मदद करेंगे।
अब देखने वाली बात होगी कि सरकार और आरबीआई आने वाले महीनों में आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए कौन-कौन से कदम उठाते हैं।
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