April 17, 2026

अंतरिक्ष तकनीक को वाणिज्यिक प्रयोगों से जोड़ने की जरूरत, वरना चूक जाएगा भारत?

भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में नई क्रांति आने वाली है, लेकिन क्या देश इस मौके का पूरा फायदा उठा पाएगा? पूर्व इसरो अध्यक्ष एस. सोमनाथ का मानना है कि भारत की अंतरिक्ष तकनीक सिर्फ सरकारी परियोजनाओं तक सीमित रह गई है, जबकि इसे वाणिज्यिक तौर पर इस्तेमाल करके अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।

सोमनाथ ने गुरुवार को भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत ने अंतरिक्ष तकनीक में बेहतरीन प्रगति की है, लेकिन इसका अधिकतर इस्तेमाल सरकारी परियोजनाओं और सामाजिक लाभ तक ही सीमित रहा है।

अंतरिक्ष तकनीक का वाणिज्यिकरण क्यों जरूरी?

सोमनाथ ने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि भारत अंतरिक्ष तकनीक का व्यापारिक इस्तेमाल बढ़ाए और इसे बड़े स्तर पर वाणिज्यिक अवसरों में बदले। उन्होंने कहा, “भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र महत्वपूर्ण बदलाव के मुहाने पर खड़ा है। हमने प्रौद्योगिकी विकसित कर ली है, लेकिन यह सिर्फ सरकारी योजनाओं तक सीमित है। अब इसे निजी कंपनियों और वाणिज्यिक प्रयोगों से जोड़ना जरूरी है, ताकि हम वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।”

अंतरिक्ष तकनीक का बाजार – सिर्फ 10% हिस्सेदारी!

पूर्व इसरो प्रमुख ने खुलासा किया कि भारत ने अभी अपने संभावित अंतरिक्ष बाजार का केवल 10 प्रतिशत ही हासिल किया है। उन्होंने कहा, “भारत में 145 करोड़ लोग हैं, लेकिन अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग बहुत सीमित है। हम सिर्फ कुछ खास डोमेन में सेवाएं दे पा रहे हैं, जबकि इसकी संभावनाएं कई गुना ज्यादा हैं।” उन्होंने इसरो और अन्य संस्थानों से अपील की कि वे अंतरिक्ष तकनीक को नए व्यावसायिक अवसरों से जोड़ें और इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर आम जनता की जिंदगी सुधारने के लिए करें।

मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में भी क्रांति ला सकती है अंतरिक्ष तकनीक

सोमनाथ ने कहा कि अंतरिक्ष तकनीक सिर्फ वैज्ञानिक प्रयोगों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे कृषि, मौसम पूर्वानुमान, संचार, परिवहन और मत्स्य पालन जैसे व्यावसायिक क्षेत्रों में भी इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने खासतौर पर मत्स्य पालन उद्योग का उदाहरण दिया, जिसमें उपग्रह डेटा का इस्तेमाल करके मछली पकड़ने के पारंपरिक तरीकों में क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता है। “अगर हमारे मछुआरे उपग्रहों से मिलने वाले डेटा का सही उपयोग करें, तो वे सही जगह पर, सही समय पर जाकर मछली पकड़ सकते हैं। इससे उनके श्रम की बचत होगी और उत्पादन भी बढ़ेगा।”

क्या भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में वैश्विक लीडर बन पाएगा?

भारत के पास चंद्रयान, मंगलयान और हालिया गगनयान मिशन जैसी शानदार अंतरिक्ष उपलब्धियां हैं। इसके बावजूद, अंतरिक्ष तकनीक को अभी तक व्यावसायिक रूप से वैश्विक स्तर पर भुनाया नहीं गया है। सोमनाथ ने इस ओर इशारा करते हुए कहा, “दुनिया में स्पेस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल नए बिजनेस मॉडल बनाने में किया जा रहा है, लेकिन भारत अभी इस दौड़ में पूरी तरह शामिल नहीं हुआ है। हमें जल्दी से जल्दी इस दिशा में कदम उठाने होंगे, नहीं तो हम बड़ी आर्थिक संभावना से चूक जाएंगे।”

भारत की अंतरिक्ष क्रांति का अगला कदम क्या होगा?

सोमनाथ के इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में बड़ा बदलाव होने वाला है। सवाल यह है कि –

✔️ क्या भारत वाणिज्यिक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में अमेरिका, रूस और चीन जैसी बड़ी ताकतों को टक्कर दे पाएगा?
✔️ क्या इसरो के साथ निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ेगी?
✔️ क्या भारत के अंतरिक्ष मिशन सिर्फ वैज्ञानिक सफलता तक सीमित रहेंगे, या फिर वे बड़े आर्थिक अवसरों में बदलेंगे?

अगर भारत इस अवसर का सही इस्तेमाल करता है, तो यह न सिर्फ अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का वैश्विक हब बन सकता है, बल्कि अर्थव्यवस्था को भी नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है। अब देखने वाली बात होगी कि सरकार और इसरो इस दिशा में कितनी तेजी से कदम उठाते हैं!

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