भारत में लाखों लोगों के ऐसे बैंक अकाउंट, डिपॉजिट और निवेश पड़े हैं जिनके बारे में या तो परिवार को जानकारी नहीं होती या समय के साथ लोग उन्हें भूल जाते हैं। इन्हीं अनक्लेम्ड सेविंग्स को वापस उनके असली मालिकों तक पहुंचाने के लिए सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण अभियान शुरू किया है, जिसके परिणाम तेजी से सामने आने लगे हैं। बैंकों और वित्तीय संस्थानों में वर्षों से रुके हुए करीब 67,000 करोड़ रुपये में से अब तक 10,300 करोड़ रुपये उनके मालिकों को वापस लौटा दिए गए हैं। यह राशि उन लाखों लोगों की है जिनके खाते लंबे समय से निष्क्रिय थे या जिनकी फिक्स्ड डिपॉजिट और अन्य निवेश मैच्योर होने के बाद भी नहीं लिए गए।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के अनुसार अप्रैल 2022 से नवंबर 2025 के बीच 33 लाख से अधिक डॉर्मेंट अकाउंट्स को सक्रिय कर उनमें मौजूद रकम खातेधारकों या उनके वारिसों तक पहुंचाई गई है। इन खातों में सेविंग्स अकाउंट, करंट अकाउंट, एफडी-आरडी, मैच्योर डिपॉजिट और वर्षों से क्लेम न किए गए निवेश शामिल थे। कई मामलों में परिवार के लोगों को पता ही नहीं था कि उनके नाम पर या उनके पूर्वजों के नाम पर कहीं रकम जमा है। सरकार के हालिया प्रयासों के चलते इन लोगों को पहली बार यह जानकारी मिली कि उनका पैसा वित्तीय संस्थाओं में लंबे समय से बिना क्लेम के पड़ा था।
सरकार ने अक्टूबर 2025 में ‘आपका पैसा, आपका अधिकार’ नाम का राष्ट्रीय अभियान शुरू किया था, जिसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों को जागरूक करना और उन्हें यह बताना था कि उनकी पुरानी सेविंग्स, भूली हुई एफडी, शेयर, डिविडेंड और पुरानी बीमा राशि कैसे वापस प्राप्त की जा सकती है। इस अभियान ने पूरे देश में लोगों को यह समझाने का काम किया कि भले ही पैसा RBI के Depositor Education and Awareness (DEA) Fund में ट्रांसफर हो गया हो, लेकिन उसका दावा कभी भी किया जा सकता है। साथ ही RBI ने एक साल के लिए एक विशेष स्कीम भी शुरू की है, जिसके तहत लोगों को अनक्लेम्ड डिपॉजिट खोजने और वापस पाने में पूरी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
लोगों की सुविधा को बढ़ाने के लिए RBI ने UDGAM नाम का डिजिटल पोर्टल भी लॉन्च किया है, जो अनक्लेम्ड बैंक डिपॉजिट खोजने का सबसे आसान तरीका माना जा रहा है। इस पोर्टल पर केवल नाम, मोबाइल नंबर और जन्म तिथि डालकर यह पता लगाया जा सकता है कि किसी व्यक्ति के नाम से कोई रकम अनक्लेम्ड रूप में किस बैंक में पड़ी है। इतना ही नहीं, शेयर, म्यूचुअल फंड, डिविडेंड और इंश्योरेंस क्लेम जैसी अन्य वित्तीय संपत्तियों को भी विभिन्न प्लेटफॉर्म—जैसे IEPF, CAMS, KFintech और बीमा कंपनियों की वेबसाइटों—के जरिए खोजा जा सकता है। राज्य सरकारों के ट्रेज़री पोर्टलों पर भी कई पुराने और अप्राप्त वित्तीय दावों की सूची उपलब्ध रहती है।
यदि किसी व्यक्ति का अनक्लेम्ड पैसा मिल जाता है, तो उसे पाने की प्रक्रिया भी अब पहले की तुलना में आसान कर दी गई है। इसके लिए संबंधित बैंक में क्लेम फॉर्म भरना होता है, साथ में KYC दस्तावेज, पुरानी डिपॉजिट रसीद (यदि उपलब्ध हो) और वारिसों के मामले में मृत्यु प्रमाण पत्र तथा संबंधित कानूनी दस्तावेज जमा करने होते हैं। वेरिफिकेशन पूरा होते ही पूरी राशि और उस पर लागू ब्याज सीधे खाते में भेज दिया जाता है। सरकार और RBI के इस संयुक्त प्रयास ने लाखों परिवारों को वह धन वापस दिलाया है जो वर्षों से फंसा हुआ था, और अब यह अभियान और भी तेजी से लोगों तक पहुंच रहा है।
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