महाराष्ट्र में चुनावी माहौल के बीच समाजवादी पार्टी की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर चर्चा में आ गई है। भिवंडी (पूर्व) से सपा विधायक रईस शेख ने पार्टी के महाराष्ट्र अध्यक्ष अबू आजमी पर गंभीर आरोप लगाते हुए सीधे पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव को पत्र लिखा है। इस पत्र में रईस शेख ने संगठन के भीतर मनमानी, निरंकुशता, टिकट वितरण में ‘प्राइवेट लिमिटेड’ जैसी कार्यशैली अपनाने और अपने खिलाफ सुनियोजित साजिश रचने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि प्रदेश नेतृत्व का यह रवैया न केवल पार्टी की लोकतांत्रिक छवि को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि भिवंडी और मुंबई जैसे अहम शहरी क्षेत्रों में पार्टी की संभावनाओं को भी कमजोर कर रहा है।
रईस शेख ने अपने पत्र में भावुक लहजे में लिखा है कि वे 2007 से एक अनुशासित सिपाही की तरह समाजवादी पार्टी की सेवा करते आ रहे हैं। मुंबई महानगरपालिका में नगरसेवक और स्थायी समिति सदस्य रहने से लेकर 2019 और 2024 में भिवंडी (पूर्व) से विधायक चुने जाने तक उनका पूरा राजनीतिक सफर समाजवादी विचारधारा को मजबूत करने के लिए रहा है। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में भिवंडी में करीब 1200 करोड़ रुपये के विकास कार्य हुए, जिससे जनता का भरोसा बढ़ा और 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्हें रिकॉर्ड 1,19,456 मत मिले, जो पिछले चुनावों के मुकाबले लगभग तीन गुना अधिक थे।
पत्र में रईस शेख ने आरोप लगाया है कि भिवंडी और मुंबई महानगरपालिका चुनावों में टिकट वितरण के दौरान पारदर्शिता पूरी तरह गायब रही। निष्ठावान और लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर ऐसे चेहरों को आगे बढ़ाया गया, जिनका समाजवादी विचारधारा से कोई जुड़ाव नहीं रहा। उन्होंने इसे ‘प्राइवेट लिमिटेड’ कल्चर करार देते हुए कहा कि इस तरह की अवसरवादी राजनीति से पार्टी की साख को गंभीर नुकसान पहुंचा है और कार्यकर्ताओं में निराशा फैल रही है।
रईस शेख ने यह भी आरोप लगाया कि उनके खिलाफ पार्टी के भीतर ही कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा चरित्र हनन और दुष्प्रचार किया गया। सार्वजनिक मंचों से उन पर भाई-भतीजावाद जैसे आरोप लगाए गए, जबकि उन्होंने शीर्ष नेतृत्व के निर्देशों का पालन करते हुए अपने भाई की दावेदारी तक वापस ले ली थी। इसके बावजूद उनके खिलाफ माहौल बनाया गया, जिससे पार्टी के अंदर एक ‘त्रासदीपूर्ण वातावरण’ पैदा हो गया है।
अपने पत्र के अंत में रईस शेख ने चेतावनी दी है कि अगर यही हालात बने रहे तो भिवंडी में सपा का संगठन बिखर सकता है और मेयर बनाने का सपना अधूरा रह जाएगा। साथ ही, मुंबई में सात साल बाद हो रहे नगर निगम चुनावों में भी पार्टी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है, क्योंकि अल्पसंख्यक, दलित और उत्तर भारतीय मतदाता इस बार निर्णायक भूमिका में हैं। उन्होंने अखिलेश यादव से पूरे मामले में हस्तक्षेप कर अबू आजमी से जवाब तलब करने और संगठन में अनुशासन बहाल करने की मांग की है।
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