पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल तेजी से गर्माता नजर आ रहा है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी ने ममता बनर्जी सरकार पर मालदा जिले में बाढ़ पीड़ितों के मुआवजे को लेकर करीब 100 करोड़ रुपये के घोटाले का गंभीर आरोप लगाया है। बीजेपी प्रवक्ता केके शर्मा ने दावा किया कि CAG रिपोर्ट और मीडिया में सामने आई जानकारियों के आधार पर यह भ्रष्टाचार उजागर हुआ है, जिसमें मुआवजा वितरण के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं।
बीजेपी प्रवक्ता के अनुसार, जांच में मुआवजा घोटाले के चार प्रमुख तरीके सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि कई मामलों में एक ही छत के क्षतिग्रस्त होने पर दो बार से लेकर 42 बार तक मुआवजा दिया गया। इसके अलावा करीब 7.5 करोड़ रुपये ऐसे पक्के मकानों के नाम पर बांटे गए, जिन्हें कथित तौर पर बाढ़ से नुकसान हुआ ही नहीं था। केके शर्मा ने दावा किया कि जिलाधिकारी की रिपोर्ट में स्पष्ट है कि मालदा में एक भी पक्का मकान क्षतिग्रस्त नहीं हुआ, इसके बावजूद भुगतान कर दिया गया।
बीजेपी ने यह भी आरोप लगाया कि मुआवजा वितरण में पात्रता के नियमों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। पार्टी का कहना है कि 108 ऐसे लोगों को बीपीएल श्रेणी का मुआवजा दिया गया, जो या तो जनप्रतिनिधि हैं या सरकारी कर्मचारी। इतना ही नहीं, करीब 7 करोड़ रुपये ऐसे लोगों को भी बांटे गए, जिन्होंने मुआवजे के लिए आवेदन तक नहीं किया था। बीजेपी ने इसे सुनियोजित भ्रष्टाचार बताते हुए कहा कि चुनावी साल में सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।
इस पूरे मामले पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से तत्काल कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन बीजेपी नेताओं ने इसे जनता के साथ धोखा करार दिया है। केके शर्मा ने कहा कि आने वाले चुनाव में जनता इस कथित घोटाले का जवाब देगी और ममता बनर्जी को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री होने के नाते ममता बनर्जी को इन आरोपों पर जवाब देना चाहिए।
वहीं, विपक्ष के नेता शुवेंदु अधिकारी और बीजेपी नेता मिथुन चक्रवर्ती ने भी ममता सरकार पर अलग-अलग मुद्दों को लेकर हमला तेज कर दिया है। शुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट को लेकर दावा किया कि यदि ममता बनर्जी वहां से दोबारा चुनाव लड़ती हैं तो उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ेगा, जबकि मिथुन चक्रवर्ती ने राज्य की स्थिति को लेकर टीएमसी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। इन बयानों से साफ है कि चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल की सियासत और ज्यादा तीखी होने वाली है।
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