July 13, 2026

भारत–रूस दोस्ती: दशकों से कायम ‘बेस्ट फ्रेंड’ वाली साझेदारी का पूरा विश्लेषण

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के 4–5 दिसंबर भारत दौरे ने एक बार फिर दोनों देशों की उस ऐतिहासिक दोस्ती को सुर्खियों में ला दिया है, जिसे अक्सर “बेस्ट फ्रेंड फॉरएवर” कहा जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में पहली बार सार्वजनिक रूप से कहा था कि “भारत का हर बच्चा जानता है कि रूस हमारा सबसे अच्छा दोस्त है।” यह वाक्य आज भी भारतीय विदेश नीति और रणनीतिक संबंधों के केंद्र में मौजूद है। भारत और रूस का रिश्ता सिर्फ राजनीतिक स्तर पर नहीं, बल्कि आम जनता की सोच में भी गहराई से जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि हर बड़े मौके पर यह साझेदारी चर्चा में आ जाती है।

 

आजादी के बाद जब भारत वैश्विक राजनीति में अपने स्वतंत्र रास्ते की तलाश कर रहा था, तब सोवियत संघ ने उसे वह राजनीतिक जगह और समर्थन दिया, जिसकी उसे सबसे अधिक जरूरत थी। गुटनिरपेक्ष आंदोलन के दौर में जब भारत ने किसी भी वैश्विक शक्ति के दबाव में न आने की नीति अपनाई, तब रूस ही वह देश था जिसने भारत की इस स्वतंत्र विदेश नीति का सम्मान किया। ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों के प्रभाव वाली वैश्विक राजनीति में भारत को रूस का सहयोग रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ। इस समर्थन ने भारत को अपने विकास और सुरक्षा से जुड़े फैसलों में स्वतंत्रता दी, जिसने दोनों देशों के रिश्ते को मजबूत आधार दिया।

 

1971 का भारत–पाकिस्तान युद्ध दोनों देशों की दोस्ती की सबसे बड़ी परीक्षा माना जाता है। इस युद्ध के दौरान जब भारत पूर्वी पाकिस्तान में अत्याचार और शरणार्थी संकट को लेकर निर्णायक कदम उठा रहा था, तब सोवियत संघ खुलकर भारत के साथ खड़ा हुआ। अमेरिका ने पाकिस्तान के समर्थन में अपना 7वां बेड़ा बंगाल की खाड़ी की ओर भेजा था, लेकिन सोवियत नौसेना ने हस्तक्षेप कर भारत का पक्ष मजबूत किया। इस एक निर्णायक क्षण ने रूसी समर्थन को भारतीय जनता की स्मृति में ‘संकट के समय साथ देने वाले दोस्त’ के रूप में स्थायी बना दिया। हालांकि 1962 के भारत–चीन युद्ध में रूस भारत के साथ स्पष्ट रूप से नहीं था, लेकिन 1971 का साथ उस कमी से कहीं ज्यादा भारी साबित हुआ।

 

भारतीय जनता का रूस पर भरोसा भी इन रिश्तों को और मजबूत बनाता है। 2023 की प्यू रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार भारत दुनिया में वह एकमात्र बड़ा देश है जहाँ बहुमत—57% लोग—रूस को सकारात्मक नजरिए से देखते हैं। यह जनसमर्थन इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि भारत ने रूस–यूक्रेन युद्ध पर तटस्थ रुख अपनाया, फिर भी भारतीय समाज रूस को भरोसेमंद साझेदार के रूप में देखता है। यह भावना दशकों से बने सांस्कृतिक, राजनीतिक और रणनीतिक जुड़ाव की वजह से आज भी कायम है।

 

भारत की सैन्य क्षमता में रूस की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही है। भारतीय वायुसेना के प्रमुख लड़ाकू बेड़ों—सुखोई-30 एमकेआई, मिग-29 और मिग-21—सब रूस की ही देन हैं। टैंक, मिसाइल सिस्टम, एयर डिफेंस, पनडुब्बियाँ और रणनीतिक हथियार तक, भारत की रक्षा शक्ति का बड़ा हिस्सा रूसी तकनीक पर आधारित है। यह सहयोग सिर्फ खरीद तक सीमित नहीं, बल्कि संयुक्त उत्पादन, तकनीकी आदान–प्रदान और रखरखाव तक फैला हुआ है, जिसने इसे एक वास्तविक सामरिक साझेदारी का रूप दिया है।

 

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी रूस ने बार-बार भारत का साथ देकर इस रिश्ते की मजबूती साबित की है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस चार बार भारत के पक्ष में वीटो कर चुका है। 1961 में गोवा मुक्ति आंदोलन के दौरान जब पश्चिमी देशों ने भारत की आलोचना की और मामला यूएन तक पहुँचा, तब सोवियत संघ ने साफ शब्दों में कहा कि भारत की कार्रवाई पूरी तरह सही है। कश्मीर से जुड़े मसले हों या दक्षिण एशिया में तनाव बढ़ने वाले प्रस्ताव—हर बार रूस ने भारत की कूटनीतिक ढाल का काम किया।

 

इन्हीं ऐतिहासिक, रणनीतिक और सामाजिक कारणों की वजह से रूस और भारत की दोस्ती दशकों से न केवल कायम है, बल्कि समय के साथ और मजबूत होती चली गई है। यही कारण है कि पुतिन के हर भारत दौरे के साथ यह पुराना वाक्य फिर गूंजता है—रूस अब भी भारत का “बेस्ट फ्रेंड फॉरएवर” है।

Share this content:

About The Author

error: Content is protected !!