सर्दियों का मौसम शुरू होते ही गर्भवती महिलाओं के लिए स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां बढ़ जाती हैं। ठंड के कारण प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ सकती है, जिससे सर्दी-खांसी, फ्लू और निमोनिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। तापमान में गिरावट ब्लड प्रेशर को प्रभावित कर सकती है और शरीर में थकान, कमजोरी और चक्कर जैसी परेशानियां महसूस हो सकती हैं। ऐसे में डॉक्टरों का कहना है कि इस मौसम में प्रेगनेंट महिलाओं को अपनी सेहत पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, ताकि मां और बच्चे दोनों सुरक्षित रहें।
विशेषज्ञों के अनुसार सर्दी का असर गर्भवती महिलाओं पर कई स्तरों पर पड़ता है। इम्यूनिटी कम होने के कारण संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है। ठंडे मौसम में ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है, जिससे पैरों में सुन्नपन, जोड़ों में दर्द और हाथ-पैर बर्फ जैसे ठंडे रहने की शिकायत आम है। सर्द हवाओं और कम धूप के कारण विटामिन डी की कमी हो सकती है, जो हड्डियों को कमजोर करती है। इसके अलावा त्वचा पर ड्राइनेस, फटना और खुजली होना भी आम बात है। कई बार मौसम में फिसलन के कारण गिरने का खतरा भी बढ़ जाता है, इसलिए सावधानी बेहद जरूरी है।
आरएमएल हॉस्पिटल की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सलोनी चड्ढा के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को गर्म कपड़े पहनकर शरीर का तापमान बनाए रखना चाहिए। विटामिन सी, विटामिन डी और एंटीऑक्सीडेंट वाली चीज़ें जैसे संतरा, कीवी, अनार, पालक और सूखे मेवे इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं। नियमित हल्की एक्सरसाइज या वॉक ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करती है और शरीर को एक्टिव रखती है। ठंड में प्यास कम लगती है, लेकिन पानी, सूप और गर्म तरल पदार्थों का सेवन बढ़ाना जरूरी है। बाहर जाते समय मास्क पहनें ताकि वायरल संक्रमण से बचा जा सके और घर में धूप लेकर विटामिन डी स्तर बनाए रखें।
विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि कमरे में हीटर अत्यधिक न चलाएं क्योंकि इससे हवा सूख जाती है और स्किन संबंधी समस्याएं बढ़ती हैं। इसके बजाय ह्यूमिडिफायर का उपयोग करें या कमरे में पानी का बर्तन रखें ताकि नमी बनी रहे। गर्भवती महिलाओं को बहुत ठंडे खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए, समय-समय पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार फ्लू वैक्सीन लगवाना चाहिए और प्रीनेटल चेकअप मिस नहीं करने चाहिए।
सर्दियों में सही डाइट, उचित कपड़े, पर्याप्त आराम और समय पर सावधानी रखकर गर्भवती महिलाएं इस मौसम को सुरक्षित और स्वस्थ तरीके से पार कर सकती हैं तथा होने वाले बच्चे के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित कर सकती हैं।
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