May 5, 2026

POCSO मामलों में सुलह की अनुमति नहीं: हाई कोर्ट का सख्त रुख

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने नाबालिग से बलात्कार के एक गंभीर मामले में पीड़िता और आरोपी के बीच हुए समझौते को खारिज कर दिया है। अदालत ने दो टूक कहा कि POCSO कानून के तहत नाबालिगों से यौन अपराध के मामलों में कोई आपसी सुलह या समझौता मान्य नहीं है। यह फैसला उस याचिका पर आया, जिसमें आरोपी ने 13 वर्षीय पीड़िता के साथ समझौते और शादी के आधार पर मुकदमा रद्द करने की मांग की थी।

 

जस्टिस जसगुरप्रीत सिंह पुरी ने अपने आदेश में कहा कि यह कानून नाबालिगों को यौन शोषण से बचाने के लिए बनाया गया है और इसमें सख्ती से सजा का प्रावधान है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नाबालिग अपनी उम्र के कारण यौन संबंध के लिए वैध सहमति नहीं दे सकते। आरोपी की यह दलील कि वह पीड़िता से शादी करना चाहता है, कानून के सामने टिक नहीं सकती, क्योंकि यह सिर्फ सजा से बचने की एक कोशिश है।

 

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी बताया कि आरोपी लंबे समय तक फरार रहा और नौ साल बाद गिरफ्तार किया गया। इसके बावजूद, वह अब शादी के बहाने समझौते का सहारा लेकर केस खत्म करवाना चाहता है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय का भी हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि यौन संबंध की कानूनी सहमति की उम्र 18 साल है और इससे नीचे के किसी भी व्यक्ति की सहमति कानूनन मान्य नहीं होती। अदालत ने मामले को बेहद संवेदनशील बताते हुए आरोपी की याचिका को खारिज कर दिया और साफ किया कि ऐसे अपराधों में समझौते की कोई जगह नही है।

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