घरेलू हिंसा केस में सास को नहीं मिला अपील का हक, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने घरेलू हिंसा मामले में एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ किया है कि घरेलू हिंसा कानून के तहत कोई भी व्यक्ति जो न तो मुकदमे में पक्षकार है और न ही अदालत के आदेश से प्रभावित है, उसे अपील का अधिकार नहीं है। ये टिप्पणी कोर्ट ने उस मामले में की जिसमें एक सास ने अपनी बहू की घरेलू हिंसा शिकायत के खिलाफ अपील की थी। लेकिन कोर्ट ने उसकी अर्जी को खारिज कर दिया।
इस केस में याचिकाकर्ता सास ने दावा किया कि उसे बहू द्वारा दायर घरेलू हिंसा केस में ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश के खिलाफ अपील करने का अधिकार होना चाहिए। उसने सेशन कोर्ट द्वारा अपील खारिज किए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। लेकिन जस्टिस विनोद चटर्जी कौल ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता “पीड़ित व्यक्ति” की परिभाषा में नहीं आती है और न ही निचली अदालत के आदेश से सीधे प्रभावित होती है, इसलिए उसे अपील दायर करने का कोई कानूनी आधार नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 29 के तहत केवल वही व्यक्ति अपील कर सकता है जो पीड़ित की श्रेणी में आता हो या उस पर सीधे कोई आदेश पारित हुआ हो। याचिकाकर्ता को ट्रायल कोर्ट में पहले खुद को पक्षकार बनाने के लिए आवेदन देना चाहिए था। अदालत ने यह भी कहा कि सास की ओर से की गई यह दलील कि वह बहू की सास है और इसलिए अपील कर सकती है, अधिनियम की भावना और व्याख्या के अनुसार पर्याप्त नहीं है। लिहाजा, हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए उसे निचली अदालत में उचित प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी।
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