रक्षा भूमि पर कब्जा: सुप्रीम कोर्ट में खुलासा, हजारों एकड़ जमीन पर अतिक्रमण
सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को केंद्र सरकार ने बताया कि देशभर में रक्षा मंत्रालय की कुल 75,629 एकड़ भूमि में से करीब 2,024 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण हुआ है और लगभग 1,575 एकड़ जमीन पूर्व कृषि पट्टेदारों के अवैध कब्जे में है। कोर्ट में दाखिल स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, इन अतिक्रमणों को हटाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने सख्त कदम उठाए हैं और एक विशेष समिति बनाकर निगरानी की जा रही है। यह मामला 2014 में एक जनहित याचिका के तहत उठाया गया था, जिसमें रक्षा भूमि पर अनधिकृत कब्जे और दुरुपयोग की सीबीआई जांच की मांग की गई थी।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि रक्षा संपदा संगठन (DEO) के तहत पिछले 10 वर्षों में करीब 1,715 एकड़ जमीन से अतिक्रमण हटाया गया है। इसके अलावा 819 एकड़ जमीन विभिन्न राज्य और केंद्र सरकार के विभागों के सार्वजनिक उपयोग जैसे स्कूल, पार्क, सड़कों और बस स्टैंड के निर्माण आदि के लिए उपयोग की जा रही है। कोर्ट को बताया गया कि इन सभी जमीनों का रिकॉर्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म “रियल टाइम रिकॉर्ड मैनेजमेंट सिस्टम (RTRM)” के जरिए सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से रखा जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर चिंता जताई और निजी संस्थाओं को रक्षा भूमि के अनियमित आवंटन को लेकर गहरी निगरानी की बात कही। अदालत ने इशारा किया कि कुछ छावनी क्षेत्रों में आलीशान बंगलों और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के निर्माण में रक्षा संपदा अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका है। केंद्र सरकार को अब दो महीने के भीतर एक नई रिपोर्ट दाखिल करनी है, जिससे पता चलेगा कि अतिक्रमण हटाने और भविष्य में इसकी रोकथाम के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
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