PM मोदी को अब तक 27 अंतरराष्ट्रीय सम्मान, 8 मुस्लिम देशों से भी मिला सम्मान—2025 के 7 महीनों में ही रच दिया नया कीर्तिमान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अब तक दुनिया के 27 देशों से अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं, जिनमें 8 मुस्लिम देश भी शामिल हैं। साल 2016 में शुरू हुए इस सम्मान श्रृंखला में सबसे ताज़ा नाम अफ्रीकी देश नामीबिया का है, जहां उन्हें ‘ऑर्डर ऑफ द मोस्ट एंशिएंट वेल्विचिया मिराबिलिस’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें नामीबिया की पहली आधिकारिक यात्रा के दौरान राष्ट्रपति नेटुम्बो नंदी-नदैतवा ने विंडहोक में आयोजित एक समारोह में प्रदान किया।
पीएम मोदी इस हफ्ते पांच देशों की यात्रा पर थे, जहां से उन्हें कुल चार अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए। खास बात यह है कि इनमें से दो सम्मान उन्हें 24 घंटे के भीतर मिले। मई 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से अब तक मोदी को मिले कुल 27 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों में से सात केवल 2025 के पहले सात महीनों में ही मिले हैं। यह एक नया रिकॉर्ड है, जिसने वैश्विक मंच पर भारत की कूटनीतिक पकड़ को भी मजबूती से स्थापित किया है।
उन देशों की बात करें जिन्होंने पीएम मोदी को सम्मानित किया, तो इनमें अमेरिका, रूस, फ्रांस, सऊदी अरब, यूएई, फिलिस्तीन, अफगानिस्तान, भूटान, ब्राजील, त्रिनिदाद एंड टोबैगो, घाना, साइपरस, श्रीलंका, मॉरिशस और अन्य देश शामिल हैं। मुस्लिम देशों में अब तक सऊदी अरब, अफगानिस्तान, फिलिस्तीन, बहरीन, मालदीव, यूएई, कुवैत और इजिप्ट पीएम मोदी को सम्मानित कर चुके हैं।
2016 में पीएम मोदी को सऊदी अरब और अफगानिस्तान से सम्मान मिला था। इसके बाद 2018 में फिलिस्तीन, 2019 में बहरीन, मालदीव और यूएई से, 2023 में इजिप्ट, और 2024 में कुवैत से यह क्रम जारी रहा। 2025 में अब तक उन्हें नामीबिया, ब्राजील, त्रिनिदाद एंड टोबैगो, घाना, साइपरस, श्रीलंका और मॉरिशस से सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।
इतिहास पर नजर डालें तो आज़ादी के बाद पंडित नेहरू, इंदिरा गांधी और डॉ. मनमोहन सिंह को दो-दो अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले थे, जबकि राजीव गांधी को एक भी नहीं मिला। ऐसे में नरेंद्र मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन गए हैं जिन्हें वैश्विक स्तर पर इतने व्यापक और विविध देशों से सम्मान मिला है।
बीजेपी का कहना है कि यह किसी एक नेता का सम्मान नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा, आर्थिक मजबूती, रणनीतिक सोच और कूटनीतिक दृढ़ता का प्रमाण है। यह उपलब्धि भारत के अंतरराष्ट्रीय कद में हो रहे लगातार विस्तार को दर्शाती है, और बताती है कि आज भारत को वैश्विक मंच पर कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है।
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