अखिलेश यादव का बीजेपी और चुनाव आयोग पर बड़ा आरोप, बोले- मतदाता सूची में हो रहा खेल, एसआईआर पर उठाए सवाल
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा और चुनाव आयोग पर मिलीभगत कर लोकतंत्र तथा संविधान को कमजोर करने का आरोप लगाया है। गुरुवार को लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी के राज्य मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि भाजपा चुनाव में कमजोर पड़ने पर चुनाव आयोग के पीछे छिप जाती है और आयोग कथित तौर पर भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा संवैधानिक संस्था और प्रशासन को साथ लेकर मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी करने की तैयारी कर रही है। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी के पीडीए प्रहरियों ने मतदाता सूची की जांच के दौरान लाखों संदिग्ध और कथित फर्जी मतदाताओं की पहचान की है। इस दौरान उन्होंने ‘समाजवादी ईसीआई ऑडिट-1’ पुस्तिका जारी करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव जीतने के लिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा पर चुनाव जीतने के लिए दस तरह की कथित चुनावी चालें अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में फर्जी नाम जुड़वाने, विपक्ष के वास्तविक मतदाताओं के नाम कटवाने, मतदान से पहले पैसे और खान-पान की चीजें बांटने तथा मतदान के दिन मतदाताओं को डराने-धमकाने जैसी गतिविधियां की जाती हैं। उन्होंने ईवीएम में मनमाने तरीके से सेटिंग कराने, मतगणना के दौरान गड़बड़ी करने, हारे हुए भाजपा प्रत्याशियों को विजेता घोषित कराने और जीत का प्रमाणपत्र दिलाने जैसे आरोप भी लगाए। सपा अध्यक्ष ने विपक्षी दलों में फूट डालने तथा दूसरे खेमों के लोगों को तोड़कर सरकार बनाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा का सदस्य होने के आधार पर किसी को मतदाता बनाए जाने और उसे भारतीय नागरिक मानने जैसी स्थिति दिखाई दे रही है। उनके मुताबिक, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और मतदाता सूची में पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है।
एसआईआर के आंकड़ों पर उठाए सवाल
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद भी बड़ी संख्या में फर्जी वोटर मौजूद होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान भरे गए 87 लाख 56 हजार फार्म-6 में से चुनाव आयोग ने केवल 71 लाख 38 हजार फार्म-6 से संबंधित जानकारी सार्वजनिक की है। उनके अनुसार, शेष 16 लाख 18 हजार नए मतदाताओं से जुड़े फार्मों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। अखिलेश यादव ने दावा किया कि इन प्रविष्टियों में ऐसे मतदाताओं के नाम शामिल हैं, जिनके नाम, उम्र और नातेदार का नाम एक समान है। उन्होंने बताया कि समाजवादी पार्टी के पीडीए प्रहरी प्रदेश के विभिन्न जिलों और विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूची की जांच कर रहे हैं। उनके दावे के मुताबिक, 16 लाख 18 हजार के अलावा तीन लाख और संदिग्ध मतदाताओं की पहचान की गई है। सपा अध्यक्ष ने कुल 19 लाख 20 हजार 732 फर्जी मतदाताओं को चिह्नित करने का दावा किया। हालांकि, इन आंकड़ों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और चुनाव आयोग का पक्ष देखना आवश्यक है।
लोनी, साहिबाबाद और महरौनी समेत कई विधानसभा क्षेत्रों का किया जिक्र
अखिलेश यादव ने उन विधानसभा क्षेत्रों के आंकड़े भी साझा किए, जहां पार्टी के मुताबिक सबसे ज्यादा फर्जी मतदाता पकड़े गए हैं। उन्होंने लोनी में 15,150, साहिबाबाद में 13,903, महरौनी में 12,669, दादरी में 12,556, जखनिया में 12,144, छपरौली में 11,574, मोदीनगर में 10,913, फरेंदा में 10,282 और नकुड़ में 10,272 संदिग्ध मतदाताओं की पहचान किए जाने का दावा किया। उन्होंने ललितपुर विधानसभा क्षेत्र के लिए 1,216 का आंकड़ा भी बताया। सपा अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश के अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में संदिग्ध नाम सामने आए हैं। आजमगढ़ का उदाहरण देते हुए उन्होंने दावा किया कि एक ही नाम से एक व्यक्ति के दस वोट दर्ज हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी स्थिति में एक मतदाता के नाम पर कई बार मतदान होने की आशंका पैदा होती है। अखिलेश यादव ने कहा कि मतदाता सूची में दर्ज प्रत्येक नाम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि वास्तविक मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रहें और किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोका जा सके।
17 और 24 अक्टूबर को बूथों पर सक्रिय रहने की अपील
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं, विधायकों, सांसदों और संगठन के सभी पदाधिकारियों से 17 और 24 अक्टूबर को अपने-अपने बूथों पर मौजूद रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता नए मतदाताओं के नाम जुड़वाने के साथ-साथ मतदाता सूची में दर्ज संदिग्ध नामों पर भी नजर रखें। उन्होंने कहा कि कोई भी फर्जी नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं होना चाहिए और किसी पात्र मतदाता का नाम छूटना भी नहीं चाहिए। सपा अध्यक्ष के मुताबिक, चुनाव आयोग अब नए सिरे से मतदाता जोड़ने के लिए वोटर लिस्ट रिवीजन अभियान चला रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर की पूरी प्रक्रिया को आयोग ने प्रभावहीन कर दिया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को आगाह किया कि जिन लोगों का नाम पहले ही किसी एक स्थान की मतदाता सूची में दर्ज है, उनका दूसरे स्थान पर दोबारा पंजीकरण न होने पाए। अखिलेश यादव ने मतदाता सूची की सावधानीपूर्वक जांच करने और बूथ स्तर पर निगरानी रखने पर जोर दिया।
मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफे की मांग, आधार को मतदाता सूची से जोड़ने का सुझाव
सपा अध्यक्ष ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और चुनावी धांधली के मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं और मतदाता सूची से जुड़ी शिकायतों का पारदर्शी तरीके से समाधान किया जाना चाहिए। अखिलेश यादव ने आधार कार्ड को मतदाता सूची से जोड़ने का सुझाव देते हुए कहा कि इससे मतदाताओं के विवरण में दोहराव और अन्य समस्याओं को दूर करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से चुनाव आयोग के वोटर लिस्ट रिवीजन अभियान के दौरान सतर्क रहने की अपील दोहराई। भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में भाजपा को हार का अंदेशा होता है, वहां कथित तौर पर बड़े पैमाने पर धांधली की जाती है। उन्होंने दावा किया कि जनता भाजपा की कथित बेईमानी और चुनावी अनियमितताओं से परिचित हो चुकी है। अखिलेश यादव ने कहा कि मतदाता सूची की निष्पक्षता और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता लोकतंत्र में जनता के विश्वास के लिए बेहद जरूरी है।
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