April 30, 2026

पहला श्राद्ध 2025: जानिए कब है तिथि, किसका किया जाएगा श्राद्ध और क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त

पितृ पक्ष का महत्व हिंदू धर्म में अत्यंत खास माना जाता है। इस दौरान लोग अपने पितरों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए श्राद्ध और तर्पण करते हैं। साल 2025 में पितृ पक्ष की शुरुआत 7 सितंबर से हो चुकी है और यह 21 सितंबर तक रहेगा। इस बीच अलग-अलग तिथियों पर अलग-अलग पितरों का श्राद्ध किया जाएगा। पितृ पक्ष का पहला श्राद्ध प्रतिपदा तिथि को होता है, जिसे प्रतिपदा श्राद्ध कहा जाता है। इस बार यह 8 सितंबर 2025, सोमवार के दिन पड़ रहा है। इस दिन उन सभी दिवंगत आत्माओं का श्राद्ध किया जाता है जिनका निधन किसी भी महीने के शुक्ल या कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा को हुआ हो।

ज्योतिषाचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को राजा के समान सुख की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि इस दिन विधि-विधान से श्राद्ध करने पर जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है और पितरों की कृपा से परिवार में कभी भी अन्न-धन की कमी नहीं होती। यही कारण है कि पितृ पक्ष की शुरुआत से ही लोग पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ श्राद्ध संस्कारों में शामिल होते हैं।

श्राद्ध करने का शुभ मुहूर्त भी बहुत मायने रखता है। 8 सितंबर को प्रतिपदा श्राद्ध के लिए कुतुप मुहूर्त सुबह 11:09 बजे से 11:59 बजे तक रहेगा। इसके बाद रौहिण मुहूर्त 11:59 से दोपहर 12:49 बजे तक है। वहीं, अपराह्न काल दोपहर 12:49 से 3:18 बजे तक शुभ माना गया है। प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 7 सितंबर की रात 11:38 बजे होगी और इसका समापन 8 सितंबर की रात 9:11 बजे होगा। ऐसे में 8 सितंबर का दिन श्राद्ध कर्म के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है।

घर पर श्राद्ध करने की विधि भी शास्त्रों में बताई गई है। सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और श्राद्ध स्थल को तैयार करें। वहां तिल, जौ, कुशा, गंगाजल, खीर, पूड़ी, दाल, चावल, फल और मिठाई जैसी चीजें रखें। दोपहर में दक्षिण दिशा की ओर मुख करके श्राद्ध करें। तांबे के पात्र में गंगाजल, तिल और जौ डालकर पितरों का नाम और गोत्र लेते हुए तर्पण करें। इसके बाद भोजन परोसकर पितरों को भोग लगाया जाता है। परंपरा के अनुसार यह भोजन गाय, कुत्ते और कौवे को भी खिलाया जाता है।

श्राद्ध के दौरान “ॐ पितृभ्य: नम:” मंत्र का जाप करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलने का विश्वास किया जाता है। अंत में ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना और दान देना श्राद्ध का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। आस्था के अनुसार इस प्रकार का श्राद्ध करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

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