April 30, 2026

उत्तरकाशी में बादल फटने से तबाही, घरों-दुकानों में घुसा पानी

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के नौगांव बाजार के स्योरी फल पट्टी इलाके में शनिवार देर शाम बादल फटने से भारी तबाही मच गई। अचानक आई इस आपदा में कई घर और दुकानें प्रभावित हुईं। जानकारी के अनुसार, एक आवासीय भवन पूरी तरह गदेरे के मलबे में दब गया, जबकि आधा दर्जन से अधिक भवनों में पानी भर गया। हालात बिगड़ने पर कई लोगों ने अपने घर खाली कर सुरक्षित स्थानों पर शरण ली।

घटना के दौरान देवलसारी गदेरे में बहाव इतना तेज था कि एक मिक्चर मशीन और कई दोपहिया वाहन पानी के साथ बह गए। एक कार भी मलबे में दब गई। राहत और बचाव कार्य के लिए एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया। पानी और मलबे का बहाव इतना तेज था कि देखने वालों को ऐसा लग रहा था मानो पूरी नदी अचानक नीचे उतर आई हो।

स्थानीय लोगों ने बताया कि नौगांव क्षेत्र में बहने वाला नाला अतिवृष्टि के कारण अचानक उफान पर आ गया। इसके चलते कई दुकानों और घरों में पानी भर गया और सड़क पर खड़े दोपहिया वाहन बह गए। इस घटना ने लोगों को अगस्त महीने की तबाही की याद दिला दी जब धराली गांव में बादल फटने से खीरगंगा में भारी बाढ़ आई थी। उस समय चार लोगों की मौत हो गई थी और कई घर तथा होटल क्षतिग्रस्त हो गए थे।

इधर, आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि उत्तराखंड के पर्वतीय जिले बेहद संवेदनशील स्थिति में हैं। हाल ही में आईआईटी रुड़की के आपदा प्रबंधन केंद्र ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि राज्य के चार जिले—रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, चमोली और उत्तरकाशी—भूकंप से प्रेरित भूस्खलन के उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में आते हैं। इनमें रुद्रप्रयाग सबसे अधिक संवेदनशील पाया गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, हिमालयी क्षेत्र भूकंपीय गतिविधियों के लिहाज से बेहद अस्थिर है और यहां आए दिन भूस्खलन की घटनाएं दर्ज की जाती हैं। भूकंप से प्रेरित भूस्खलन भविष्य में उत्तराखंड के लिए और भी बड़े खतरे का कारण बन सकते हैं। यही कारण है कि जिला स्तर पर भूस्खलन के खतरे की जोनिंग की जा रही है ताकि आपदा की स्थिति में त्वरित कदम उठाए जा सकें।

फिलहाल, उत्तरकाशी के नौगांव इलाके में हालात सामान्य करने के लिए प्रशासन ने राहत कार्य तेज कर दिए हैं। एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन मलबा हटाने और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटा है। हालांकि, लगातार बारिश और ऊपरी इलाकों में हो रहे भूस्खलन के कारण बचाव कार्यों में चुनौतियां बनी हुई हैं।

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