बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के नामांकन के साथ ही कांग्रेस पार्टी के अंदर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। टिकट बंटवारे को लेकर पार्टी में गुटबाजी बढ़ गई है। महागठबंधन में सीटों के बंटवारे में देरी और जातिगत आधार पर उम्मीदवारों के चयन ने कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को नाराज कर दिया है। कई पूर्व विधायक और जिला अध्यक्ष बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम के खिलाफ खुलकर विरोध कर रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं ने पटना में एक आपात बैठक बुलाई है, जिसमें कई वरिष्ठ नेता, पूर्व प्रत्याशी और संगठन के पदाधिकारी शामिल होंगे। इस बैठक में टिकट वितरण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए जाएंगे और पार्टी नेतृत्व को अपना विरोध दर्ज कराया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, नाराज नेताओं का कहना है कि टिकट बंटवारे में स्थानीय कार्यकर्ताओं की अनदेखी की गई और जातिगत समीकरणों के आधार पर बाहरी उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी गई है।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब महागठबंधन के भीतर सीट शेयरिंग को लेकर आखिरी वक्त तक फैसला नहीं हो सका। इससे कांग्रेस और राजद दोनों को अपने-अपने प्रत्याशी जल्दबाजी में घोषित करने पड़े। कांग्रेस को अपेक्षाकृत कम सीटें मिलने से नाराजगी और बढ़ गई। अब यही असंतोष खुले विरोध का रूप ले चुका है। दो दिन पहले पटना एयरपोर्ट पर भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झड़प और हाथापाई की घटना हुई थी, जिससे संगठन में मतभेद और गहराते नजर आ रहे हैं।
इस बीच, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने विरोधी सुरों के बीच अपने तेवर दिखाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट किया – “दलित दबेगा नहीं, झुकेगा नहीं, अब इंकलाब होगा।” उनके इस बयान को पार्टी के भीतर जारी गुटबाजी के बीच ताकत दिखाने का संकेत माना जा रहा है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि शनिवार दोपहर पटना में कांग्रेस का असंतुष्ट गुट प्रेस कॉन्फ्रेंस कर टिकट बंटवारे में हुई अनियमितताओं पर खुलकर बात करेगा। बिहार कांग्रेस में यह बगावत ऐसे समय में हुई है जब चुनाव प्रचार की शुरुआत ही हुई है। ऐसे में संगठन के भीतर जारी यह खींचतान चुनावी रणनीति पर असर डाल सकती है और महागठबंधन के लिए सिरदर्द साबित हो सकती है।
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