पटना को मिली अनोखी सौगात: अब गंगा में दौड़ेगी वॉटर मेट्रो, कोच्चि के बाद देश का दूसरा शहर बना राजधानी
बिहार की राजधानी पटना जल्द ही देश के उन गिने-चुने शहरों में शुमार हो जाएगी जहां वॉटर मेट्रो सेवा उपलब्ध होगी। केंद्रीय पत्तन, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि कोच्चि के बाद पटना देश का दूसरा शहर होगा जहां गंगा नदी में इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड नौकाओं से संचालित वॉटर मेट्रो सेवा शुरू की जाएगी। यह घोषणा न केवल पटना के लिए गौरव की बात है, बल्कि ट्रैफिक जाम से त्रस्त राजधानी को एक नई सांस भी देने वाली है।
पटना की सड़कों की वर्तमान स्थिति और सीमित विस्तार की संभावनाओं को देखते हुए, यह परियोजना बेहद आवश्यक मानी जा रही है। शहर चारों ओर से नदियों से घिरा हुआ है — उत्तर में गंगा, पश्चिम में सोन और दक्षिण में पुनपुन — जिससे सड़क चौड़ीकरण का कार्य लगभग असंभव हो गया है। यही कारण है कि अब जल मार्ग को सार्वजनिक परिवहन का वैकल्पिक और प्रभावी साधन माना जा रहा है।
वॉटर मेट्रो को पटना की आगामी रेल मेट्रो परियोजना का पूरक माना जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, पटना मेट्रो की ब्लू लाइन—जो पटना जंक्शन को अंतरराज्यीय बस टर्मिनल से जोड़ेगी—15 अगस्त से चालू होने की उम्मीद है। ऐसे में वॉटर मेट्रो टर्मिनल्स को ऐसे स्थानों पर स्थापित करने की योजना है जो प्रमुख परिवहन हब, रिहायशी कॉलोनियों और व्यावसायिक इलाकों के पास हों, ताकि “लास्ट माइल कनेक्टिविटी” को सरल और सुगम बनाया जा सके।
इससे पहले, भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण ने इस परियोजना के लिए विस्तृत व्यवहार्यता अध्ययन शुरू किया था और कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड (KMRL) को इस मॉडल को गंगा व उसकी सहायक नदियों पर लागू करने की संभावना का मूल्यांकन करने का जिम्मा सौंपा गया था।
गौरतलब है कि कोच्चि वॉटर मेट्रो, जिसे 2023 में लॉन्च किया गया था, भारत की पहली और अब तक की सबसे सफल जल-आधारित शहरी परिवहन सेवा मानी जाती है। पटना इस सफलता को दोहराने की तैयारी में है, और यदि योजना के अनुसार कार्य हुआ तो यह सेवा राजधानी के लाखों नागरिकों को हर दिन ट्रैफिक की झंझट से राहत दे सकती है।
वॉटर मेट्रो सेवा के शुरू होने से जहां पर्यावरण के अनुकूल परिवहन को बढ़ावा मिलेगा, वहीं यह पटना की शहरी योजना को भी आधुनिक और टिकाऊ दिशा में अग्रसर करेगी।
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