इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने अफगानिस्तान से तोड़े सारे रिश्ते, भारत पर तालिबान को शरण देने का आरोप
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच संबंधों में आई गहरी खाई अब पूरी तरह खुलकर सामने आ गई है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने ऐलान किया है कि इस्लामाबाद अब काबुल के साथ किसी भी तरह का राजनयिक या राजनीतिक रिश्ता नहीं रखेगा। उन्होंने आदेश जारी करते हुए पाकिस्तान में रह रहे सभी अफगान नागरिकों को अपने देश लौटने के लिए कहा है। आसिफ ने अफगानिस्तान की मौजूदा तालिबान सरकार पर भारत की गोद में बैठने और पाकिस्तान के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया।
रक्षा मंत्री ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि अब पाकिस्तान की ओर से कोई विरोध पत्र या शांति वार्ता की पहल नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा, “जहां भी आतंकवाद का स्रोत होगा, उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।” आसिफ के अनुसार, काबुल अब भारत और प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के साथ मिलकर पाकिस्तान की सुरक्षा के खिलाफ काम कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वही तालिबान नेता जो कभी पाकिस्तान में शरण लेकर रहते थे, आज भारत के इशारे पर पाकिस्तान को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं।
यह विवादित बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी ने भारत का छह दिवसीय दौरा किया था। मुत्ताकी की इस यात्रा के बाद पाकिस्तान की बेचैनी बढ़ गई थी। रिपोर्टों के अनुसार, इसी दौरान पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की सीमा के अंदर हवाई हमले किए, जिसमें कम से कम आठ लोगों की मौत हुई, जिनमें तीन अफगान क्रिकेट खिलाड़ी भी शामिल बताए गए। इस घटना से पहले दोनों देशों के बीच 48 घंटे का युद्धविराम लागू था, जो अब टूट चुका है।
ख्वाजा आसिफ ने आगे कहा कि पाकिस्तान अब अफगानिस्तान को पहले जैसा पड़ोसी नहीं मान सकता। उन्होंने दावा किया कि काबुल के साथ पिछले पांच वर्षों में पाकिस्तान ने कई बार शांति के प्रयास किए, लेकिन हर बार अफगानिस्तान की ओर से केवल शत्रुता और उकसावे की कार्रवाई मिली। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने अफगान सरकार को 836 विरोध पत्र और 13 औपचारिक नोट (डेमार्शे) भेजे, लेकिन किसी का सकारात्मक जवाब नहीं मिला।
आसिफ ने पाकिस्तान में रह रहे अफगान नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा, “अब आपके पास अपनी सरकार है, अपने संसाधन हैं। पाकिस्तान की जमीन और संसाधन उसके नागरिकों के लिए हैं। आत्म-सम्मान रखने वाले राष्ट्र किसी दूसरे की जमीन पर नहीं पलते।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि काबुल ने आक्रामक रवैया जारी रखा तो पाकिस्तान आत्मरक्षा में हर कदम उठाने को तैयार है। इस फैसले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और गहराने की संभावना है, जिससे दक्षिण एशिया की स्थिरता पर गंभीर असर पड़ सकता है।
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