May 5, 2026

यूएन रिपोर्ट ने खोली पाकिस्तान की पोल, पहलगाम हमले में लश्कर-ए-तैयबा की भूमिका साबित

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले को लेकर संयुक्त राष्ट्र ने एक चौंकाने वाली रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि इस हमले में पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की सीधी भूमिका थी। हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की मौत हुई थी। अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की इस रिपोर्ट ने पाकिस्तान के उन सभी दावों को झूठा साबित कर दिया है, जिसमें वह इस हमले से अपना पल्ला झाड़ता रहा है।

 

संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध निगरानी टीम ने कहा है कि जिस संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी — ‘द रेजिडेंट फ्रंट’ (TRF), वह लश्कर से सीधा जुड़ा है। टीम ने यह भी साफ किया कि लश्कर के सहयोग और योजना के बिना इस तरह का हमला संभव नहीं था। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि भारत जिस बात को बार-बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कहता रहा है, उसे अब यूएन ने भी स्वीकार किया है।

 

रिपोर्ट में TRF और लश्कर-ए-तैयबा के रिश्तों की भी पुष्टि की गई है। TRF की स्थापना 2019 में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI और लश्कर के सरगना हाफिज सईद के सहयोग से की गई थी। यह संगठन जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को नया नाम देने और पाकिस्तान के हाथ झूठा साफ दिखाने के लिए बनाया गया था।

 

हमले के बाद से पाकिस्तान लगातार TRF और लश्कर को बचाने की कोशिशों में जुटा है। जब यूएन सुरक्षा परिषद ने पहलगाम हमले की निंदा में बयान जारी किया, तो पाकिस्तान की साजिश के तहत उसमें से TRF का नाम ही हटा दिया गया। अब जबकि निगरानी टीम की विस्तृत रिपोर्ट सामने आ गई है, पाकिस्तान की भूमिका और अधिक संदेह के घेरे में आ गई है।

 

पाकिस्तानी सरकार की तरफ से बार-बार यह दावा किया गया है कि देश में कोई भी आतंकी संगठन सक्रिय नहीं है। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, हमले के तुरंत बाद हाफिज सईद और जैश-ए-मोहम्मद के मसूद अजहर को पाकिस्तान ने अंडरग्राउंड करवा दिया। पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो भी इस बात के संकेत दे चुके हैं कि ये आतंकी अब अफगानिस्तान में छिपे हो सकते हैं।

 

यूएन की यह रिपोर्ट भारत की उस बात को और मजबूत करती है कि पाकिस्तान राज्य प्रायोजित आतंकवाद को बढ़ावा देता है और दुनिया के सामने झूठ का मुखौटा पहनकर चलता है। पहलगाम हमले की यह पुष्टि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की स्थिति को और मजबूत करती है।

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