‘चाइना गुरु’ पर जयशंकर का वार: राहुल के बयान को बताया सच, लेकिन बताया कब और कैसे हुआ गठजोड़
संसद के मानसून सत्र के आठवें दिन विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्यसभा में विपक्ष पर तीखा हमला बोला। राहुल गांधी पर तंज कसते हुए उन्हें ‘चाइना गुरु’ कहा और उनके पुराने बयानों को निशाने पर लिया। जयशंकर ने कहा कि राहुल गांधी ने दावा किया था कि चीन और पाकिस्तान एक हो गए हैं, जो बात सही है, लेकिन यह आज की बात नहीं है, बल्कि इसकी नींव बहुत पहले रखी जा चुकी थी।
विदेश मंत्री ने कहा कि चीन और पाकिस्तान का यह गठजोड़ रातोंरात नहीं बना। उन्होंने कटाक्ष किया कि राहुल गांधी को यह तब समझ आया, जब इतिहास की कक्षा में शायद वे सो रहे थे। जयशंकर ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस के समय चीन के राजदूतों से मुलाकातें होती थीं और चीनी हितों को प्राथमिकता दी जाती थी। उन्होंने यह बात उस वक्त कही, जब राज्यसभा में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर चर्चा चल रही थी।
एस. जयशंकर ने कहा कि जिन लोगों को चीन के साथ अत्यधिक लगाव था, उन्होंने ‘चाइंडिया’ नाम की अवधारणा गढ़ दी थी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या जिन देशों के साथ भारत का युद्ध हुआ है, उन्हें रणनीतिक साझेदार कहना उचित है? उन्होंने कांग्रेस शासन के दौरान 3जी-4जी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में चीनी कंपनियों को न्योता देने पर भी गंभीर सवाल खड़े किए।
सिंधु जल संधि को लेकर विदेश मंत्री ने स्पष्ट कहा कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद नहीं करता, तब तक यह संधि स्थगित रहेगी। उन्होंने कहा, “खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।” यह बयान पाकिस्तान को सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
जयशंकर के भाषण में जहां राहुल गांधी पर व्यंग्य का तीखा स्वर था, वहीं पाकिस्तान और चीन की मौजूदा स्थिति को लेकर भारत के रुख को भी स्पष्टता से रखा गया। संसद में उनका यह संबोधन विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर सरकार की आक्रामक और मुखर रणनीति को दर्शाता है।
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